स्कूलों में पढ़ने वाले पांच हजार छात्र गायब
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जिले के करीब आठ सौ सरकारी स्कूलों से मात्र छह महीने के भीतर पढ़ते-पढ़ते करीब पांच हजार छात्र गायब हो गए। शिक्षा विभाग के रिकार्ड में जब यह बात सामने आई तो शिक्षा अधिकारी भी हैरान रह गए।
अफसरों को स्कूलों में अचानक कम हुई छात्रों की संख्या (एनरोलमेंट) की बात हजम नहीं हो रही है जिसके चलते जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देश जारी किए हैं कि जल्द ही सभी सरकारी स्कूलों में छात्रों की कुल संख्या की फिजिकल वेरिफिकेशन करवाई जाएगी ताकि सरकारी स्कूलों से छात्रों की अचानक घटी संख्या की सच्चाई सामने आ सके। उधर, सरकारी स्कूलों में छात्रों की कम हुई संख्या एनरोलमेंट में धांधली की ओर भी इशारा कर रही है, इसीलिए शिक्षा विभाग अब इस बात की वेरिफिकेशन करवाएगा।
ऐसे हुआ छात्रों के गायब होने का खुलासा
इस शैक्षणिक सत्र में शिक्षा विभाग ने जोरशोर से प्रवेश उत्सव मनाने का फैसला लिया था जिसके चलते सभी सरकारी स्कूलों से मौजूद छात्रों की संख्या संबंधी रिपोर्ट तलब की गई थी।
जिला शिक्षा कार्यालय में रिपोर्ट को कंपाइल कर शिक्षा निदेशालय हरियाणा को भेजा गया था लेकिन शिक्षा निदेशालय में अंबाला की डीओ ने जैसे ही सरकारी स्कूलों का ‘डाईस’ रिकार्ड देखा तो इस बात का खुलासा हुआ कि डाईस रिकार्ड और अप्रैल 2014 में तैयार किए गए छात्रों की संख्या के रिकार्ड में पांच हजार छात्र गायब हो गए हैं।
डाईस रिकार्ड के मुताबिक अंबाला के सरकारी स्कूलों में 106000 छात्र दाखिल हैं और पढ़ रहे हैं लेकिन अब अप्रैल 2014 में तैयार की गई सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों में 101115 छात्र मौजूद हैं।
यह होती है ‘डाईस’ रिपोर्ट
सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या की वेरिफिकेशन करवाने के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, सरकारी स्कूलों में हर साल स्कूल, शिक्षा एवं छात्रों के विकास के लिए जितनी भी योजनाएं बनाई जाती हैं, वे डाईस रिपोर्ट के आधार पर बनाई जाती हैं।
सभी सरकारी स्कूलों को हर शैक्षणिक वर्ष में 30 सितंबर तक उनके स्कूल में कितने छात्र मौजूद हैं, इसकी संख्या शिक्षा विभाग को देनी होती है।
इस संख्या के बाद शिक्षा विभाग यह तय करता है कि किस सरकारी स्कूल में छात्रों की संख्या के मुताबिक कितना एजुकेशन बजट जारी करना है। इसी डाईस रिपोर्ट के आधार पर ही तमाम शिक्षा नीतियों को तय किया जाता है।
ऐसे होती छात्रों की संख्या में धांधली
शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार दरअसल छात्रों की संख्या में धांधलेबाजी स्कूल स्तर पर ही हो जाती है। बहुत से सरकारी स्कूल हर साल 30 सितंबर को तैयार होने वाली छात्रों की संख्या संबंधी रिपोर्ट में अपने-अपने स्कूलों में छात्रों की संख्या कागजों में ही बढ़ा देते हैं ताकि उनके स्कूलों में शिक्षकों की पोस्ट सरप्लस न हो और न ही उन्हें स्कूलों में कम छात्र होनी की वजह से इधर-उधर ट्रांसफर किया जाए। इसी तरह कागजों में तो छात्रों की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन मूल रूप से छात्रों की संख्या कम रहती है।
अंबाला के जिला शिक्षा अधिकारी सुमन आर्य ने बताया कि ‘यह बात सामने आई है कि 30 सितंबर, 2013 को आधार बनाकर जो डाईस रिपोर्ट तैयार की गई थी और अब अप्रैल 2014 को छात्रों की संख्या की जो रिपोर्ट तैयार की गई है उसमें करीब पांच हजार छात्रों का फर्क है। विभाग को थोड़ी आशंका है जिसके लिए छात्रों की संख्या की वेरिफिकेशन करवाने का फैसला लिया गया है ताकि पता चल सके कि पांच हजार छात्र कहा गायब हो गए।’