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उत्तराखंड में ही मिलेगा अच्छा रोजगार
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 28 Dec 2014 11:13 AM IST
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कोर्स करने के बाद छात्रों को उत्तराखंड के ही उद्योगों में अच्छा रोजगार मिल सकेगा।
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इसके लिए प्रदेश में इंडस्ट्री-एकेडमिया बोर्ड की स्थापना होने जा रही है। उच्च शिक्षा मंत्री ने सभी निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में इसकी जानकारी दी।
विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की शिरकत
शनिवार को दून विश्वविद्यालय के सभागार में उच्च शिक्षा मंत्री इंदिरा हृदयेश ने ‘उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की समीक्षा’ पर बैठक बुलाई। बैठक में प्रदेश के करीब 22 निजी और सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने शिरकत की।
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मंत्री ने बताया कि हाल ही में कुछ उद्योगों ने उनसे संपर्क किया है, वे चाहते हैं कि प्रदेश के शिक्षण संस्थानों से डिग्री लेने वाले युवाओं को यहीं रोजगार मिले। इसके लिए उन्होंने उद्योगों की मांग के मुताबिक कोर्स तैयार करने की बात कही। इस पर सभी विश्वविद्यालयों और सरकार के बीच इंडस्ट्री-एकेडमिया बोर्ड के गठन की सहमति दी गई।
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जल्द ही यह बोर्ड तैयार हो जाएगा, जो न केवल नए कोर्स तैयार करने में सहायता करेगा बल्कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों की हर छह माह पर समीक्षा भी करेगा।
शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर
बैठक में मंत्री इंदिरा हृदयेश ने सभी शिक्षण संस्थानों से शिक्षा की गुणवत्ता बनाते हुए उत्कृष्ट केंद्र (सेंटर आफ एक्सीलेंस) बनाने पर जोर दिया। कई विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने भावी योजनाएं बताईं।
प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने कहा कि वक्त बीतने के साथ कई पाठ्यक्रम बाहर हो जाएंगे। इसलिए शोध पर ध्यान देने की जरूरत है।
हमारी ओर भी ध्यान दें
बैठक में ग्राफिक एरा विवि, ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि, यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, डीआईटी विवि, उत्तरांचल विवि समेत कई निजी विवि के कुलपतियों ने सरकार को उनकी ओर ध्यान देने की मांग की।
मंत्री ने कहा कि भविष्य में निजी विवि के साथ सरकार कुछ ऐसे समझौते करेगी, जिससे प्रदेश के युवाओं को लाभ हो।
बैठक में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के समन्वयक डॉ. सतपाल सिंह साहनी, अपर सचिव उच्च शिक्षा अशोक कुमार, उपसचिव लक्ष्मण सिंह सहित भारी संख्या में कुलपति मौजूद रहे। सोमवार को प्रदेश के सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों के साथ मंत्री की बैठक होगी।
इन्होंने रखी ये बातें
कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कैंसर और नैनो साइंस में, दून विवि के कुलपति प्रो. वीके जैन ने अर्थशास्त्र और पर्यावरण में एक्सीलेंस की बात कही।
श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत ने संसाधनों और कर्मचारियों की कमी बताई, जिस पर मंत्री ने कहा कि विवि ने दो वर्षों में अच्छा काम किया है। उन्होंने विवि को आपदा प्रबंधन का अलग विभाग बनाने के निर्देश दिए।
उत्तराखंड संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. महावीर अग्रवाल ने संस्कृत को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की आवश्यकता जताई। उन्होंने संस्कृत भाषा और प्राचीन ग्रंथों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने पर बल दिया।
जरूरतों पर मंत्री खामोश
बैठक में जब सरकारी विवि के कुलपतियों ने कर्मचारियों की कमी का मुद्दा उठाया तो मंत्री खामोश हो गईं। श्रीदेव सुमन विवि, दून विवि, संस्कृत विवि, आयुर्वेद विवि, तकनीकी विवि समेत सभी सरकारी विवि में कर्मचारियों की भारी कमी की वजह से काम प्रभावित हो रहा है।
हर बार बैठक में मंत्री नई भर्ती का आश्वासन देती हैं लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ पाती है। एक बार फिर सभी विवि आश्वासन लेकर लौट गए।