फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   meeting of PU Senate members

एक बार फिर दोहराया जाएगा पीयू का इतिहास !

Tue, 03 Dec 2013 11:04 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 03 Dec 2013 11:04 PM IST
विज्ञापन
meeting of PU Senate members

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) सीनेट की रविवार को होने वाली बैठक में हंगामा होना तय है। इस बैठक में सीनेट सिंडीकेट की ओर से हाल ही में लिए गए कुछ फैसलों को बदल सकती है।

विज्ञापन


पीयू के इतिहास में इससे पहले भी सीनेट ने सिंडीकेट के कई फैसलों को पलट दिया है। ऐसे में रविवार को होने वाली सीनेट की बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विज्ञापन


सीनेट की यह बैठक सिंडीकेट चुनाव से एक दिन पहले हो रही है। बैठक में इन मुद्दों पर होने वाले फैसलों से ही सिंडीकेट चुनाव की रूपरेखा तय हो जाएगी और यह स्पष्ट हो जाएगा कि सीनेट में किस गुट का बहुमत है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अगर बैठक में सीनेट सिंडीकेट के फैसलों को पलटने में सफल रहती है तो इससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि पिछले साल सिंडीकेट चुनाव में सभी 15 सीटें जीतने वाले गोयल गुट के लिए इस साल सिंडीकेट चुनाव में जीत की राह आसान नहीं होगी।

कुलपति की पत्नी प्रो.नीरा ग्रोवर को एक्सटेंशन देने का मुद्दा रहेगा अहम
सिंडीकेट की 8 अक्तूबर को हुई बैठक में प्रो. नीरा ग्रोवर को एक साल की एक्सटेंशन देने की स्वीकृति नहीं दी थी। अब सीनेट सिंडीकेट के इस फैसले के बदलने की तैयारी कर रही है।

पीयू कैलेंडर के वाल्यूम ए के नियम 3.2 में स्पष्ट है कि कोई भी मुद्दा सीनेट के एजेंडे में तब तक शामिल नहीं किया जा सकता है, जब तक उस पर सिंडीकेट ने विचार न किया हो।

सीनेट का एक गुट इस मुद्दे को बैठक में लाने का विरोध कर रहा है। इस गुट के सदस्यों का कहना है कि बैठक के एजेंडे में इस मुद्दे के साथ दो पत्र भी शामिल किए गए हैं, जिन्हें सिंडीकेट में पहले नहीं रखा गया था।

एक पत्र प्रो.नीरा ग्रोवर का है जो कि उन्होंने डीयूआई को लिखा है और दूसरा पत्र संगीत विभाग की फैकल्टी का है, जिन्होंने प्रो. ग्रोवर को एक साल के लिए और नियुक्त करने की बात कही है।

लेकिन, सीनेट के एक अन्य गुट के सदस्यों का कहना है कि पीयू कैलेंडर में सिर्फ यह लिखा है कि जिस मुद्दे पर सिंडीकेट में विचार कर लिया गया हो उसे सीनेट की बैठक में लाया जा सकता है।


ऐसे में पीयू के नियम के तहत ही यह मुद्दा लाया जा रहा है। इस मुद्दे पर सीनेट के दोनों गुटों के बीच मतभेद के चलते हंगामा होना तय है।

इसके साथ ही बैठक में सिंडीकेट की ओर से 8 अक्तूबर को लिया गया एक और फैसला लाया जा रहा है। सिंडीकेट ने लोक प्रशासन विभाग में चार सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed