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नई रिसर्चः स्टूडेंट ने खोज निकाली डेंड्रफ की वजह

Tue, 13 Jan 2015 03:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 13 Jan 2015 03:49 PM IST
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Medical Student Research to Find Out Hair Dandruf Insect

पीजीआई के मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी के रिसर्च स्कालरों ने गुरु दक्षिणा की एक नई मिसाल पेश की है। एडिशनल प्रोफेसर, स्कॉलर और अन्य साइंटिस्ट ने डैंडरफ फैलाने वाले यीस्ट की एक नई प्रजाति खोजने में कामयाबी हासिल की।

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तीनों ने मिलकर अपनी रिसर्च को पूरा किया और इंटरनेशनल पेटेंट भी हासिल किया। स्कॉलरों ने इसका नाम अपने मेंटर व माइक्रोबायोलाजी डिपार्टमेंट के एचओडी डा. अरुणालोके चक्रबति के नाम पर रखा है।
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पूरे विश्व में अब इस प्रजाति को एम. अरुणालोकेई के नाम से जाना जाएगा। रिसर्च में इंस्टीट्यूट आफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी के साइंटिस्ट भी शामिल रहे।

ये जंतु बालों में फैलाते हैं डैंडरफ

Medical Student Research to Find Out Hair Dandruf Insect

माइक्रोबायोलॉजी के एडिशनल प्रोफेसर एमआर शिवाप्रकाश ने बताया कि वैज्ञानिकों ने सिर के बाल में डैंडरफ पैदा करने वाली दो ही प्रजातियों की खोज की थी, लेकिन डैंडरफ का कोई स्थायी और सफल इलाज नहीं मिल पा रहा था।

पीएचडी स्टूडेंट प्रसन्ना व इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबायल टेक्नोलॉजी के स्टूडेंट जीएस प्रसाद यीस्ट की नई प्रजाति को खोजने में कामयाबी हासिल की। यह डैंडरफ फैलाने का काम करता है।

उन्होंने बताया कि इस रिसर्च से डैंडरफ के इलाज में सफलता मिल सकती है। यह प्रजाति मैलासीजिया फैमिली से संबंध रखता है। पहली प्रजाति का नाम एम. रेस्ट्रिका व दूसरी का नाम एम. ग्लोबोसा है। पीजीआई की रिसर्च के बाद अब तीसरी प्रजाति को एम. अरुणालोकेई के नाम से जाना जाएगा।

यह मकसद था रिसर्च करने का

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डॉ. शिवा प्रकाश ने बताया कि इस रिसर्च का मकसद डैंडरफ के मुख्य कारण को जानना था। अब तक इसका स्थाई इलाज नहीं मिल पाया है। इस प्रजाति की खोज के बाद अब इलाज के लिए नई एंटी फंगल ड्रग्स की खोज आसानी से हो सकती है।

इस रिसर्च को पूरा करने में कम से कम दो साल का वक्त लगा है। डैंडरफ से पीड़ित 200 पेशेंट व 100 हेल्दी शहरी व ग्रामीण को लोगों को शामिल किया गया।

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