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एमबीए का बदलेगा सेलेबस, प्लेसमेंट पर फोकस
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 02 Mar 2014 08:55 AM IST
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एलयू के इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस (आईएमएस) में चल रहे एमबीए कोर्सेज का पाठ्यक्रम इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार बदला जाएगा। इंडस्ट्री से जुड़े लोग कोर्स अपडेट करवाने में सलाहकार की भूमिका निभाएंगे।
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आगे जिस गति से इंडस्ट्री में बदलाव होगा, उसी तर्ज पर कोर्स भी अपडेट होता रहेगा। प्लेसमेंट की व्यवस्था मजबूत बनाई जाएगी और स्टूडेंट्स के भीतर छिपे हुनर को तराशने के लिए फिनिशिंग स्कूलों से टाईअप भी किया जाएगा।
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यह निर्णय आईएमएस की ओर से बीरबल साहनी पुरावनस्पति अनुसंधान संस्थान के प्रेक्षागृह में आयोजित सीईओ कॉन्क्लेव में लिया गया। आईआईएम काशीपुर के एडवाइजर व एपोजी लीड्स के सीईओ पार्थो प्रीतम दास गुप्ता ने कहा कि देश में जॉब की कमी नहीं है।
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हमें कुशल लोग नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि जिस गति से इंडस्ट्री बदल रही है, उसी रफ्तार से एमबीए कोर्सेज का सिलेबस भी अपडेट किया जाना चाहिए।
आईआईएम की तरह ही अन्य इंस्टीट्यूट भी अपने यहां मैनेजमेंट डवलपमेंट प्रोग्राम चलाएं। पार्थो प्रीतम दास ने सुझाव दिया कि यूपी में स्मॉल इंडस्ट्री पर प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करें और उसे सरकार को सौंपे।
इससे इंडस्ट्री व एकेडमिया के बीच अधिक से अधिक इंटरेक्शन होगा। कार्यक्रम में इंडस्ट्री के दिग्गज एस. वेंकटेश ने कहा कि एकेडमिया बहुत स्ट्रांग है और उसने मंदी के दौर में हमारा मार्गदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स को माइंडसेट करना होगा कि अधिक से अधिक पैकेज पर मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब पाने के बजाय स्वरोजगार स्थापित करें। पढ़ाई के साथ-साथ वोकेशनल ट्रेनिंग और इनोवेशन करने के लिए स्टूडेंट को प्रेरित करें।
नंबर सिस्टम की बजाए सीजीपीए सिस्टम लागू करना चाहिए और इसमें स्टूडेंट्स को अधिक से अधिक एसाइनमेंट और प्रोजेक्ट तैयार करने पर जोर देना चाहिए।
एबीजी ग्रुप के प्रेसिडेंट (एचआर) एसके दत्ता ने कहा कि एमबीए का कोर्स चलाने वाले इंस्टीट्यूट्स को चाहिए कि ववे इंडस्ट्री से सालभर इंटरेक्शन रखें। सीईओ कॉन्क्लेव हर साल करें और इंडस्ट्री से जुड़े संगठनों को अपने यहां आमंत्रित करें और उनसे इनपुट लेकर बदलाव करें।
सीईओ कॉन्क्लेव में केके मिल्क के प्रमुख मिस्टर काचरू ने कहा कि यूपी में दुग्ध उत्पादन काफी अधिक है। ऐसे में स्टूडेंट्स को इस उद्योग में कदम रखने चाहिए।
अभी हालात अच्छे नहीं हैं, आगे स्टूडेंट इनोवेशन कर इसे अच्छे ढंग से मार्केटिंग करें तो बेहतर होगा। आईएमएस के ओएसडी प्रो. अरविंद मोहन ने इंडस्ट्री के सुझावों के हिसाब से बदलाव करने की घोषणा की।
सीईओ ने सुझाव दिया कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आईआईएम के स्टूडेंट अधिक नहीं जाते हैं, ऐसे में आईएमएस वहां पर लीडर की भूमिका में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाएं।
प्रो. मोहन ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि जो भी सुझाव हमें मिले हैं, उन्हें बेहतर ढंग से लागू किया जाएगा।