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शकुंतला विवि में बनेगा बहु निशक्तता अध्ययन केंद्र
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 03 Jan 2014 01:29 AM IST
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उत्तर प्रदेश शकुंतला देवी विकलांग एवं पुनर्वास विश्वविद्यालय में बहु निशक्तता अध्ययन केंद्र स्थापित होगा, जिसमें निशक्तों पर शोध के साथ ही इलाज और उनके पुनर्वास के लिए भी काम किया जाएगा।
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गुरुवार को आयोजित हुई विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली। अध्ययन केंद्र में भारतीय भाषाओं के साथ ही विदेषी भाषाओं का अध्ययन किया जा सकेगा।
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विश्वविद्यालय कुलपति मनोज कुमार की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इसके साथ ही कई मामलों पर सहमति बनी। निशक्तों के साथ ही सामान्य छात्रों को शिक्षा देने के लिए स्थापित किए गए विश्वविद्यालय में अब लोगों को विभिन्न भाषाओं के अध्ययन की सुविधा मिलेगी।
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स्कूल ऑफ लैंग्वेज के तहत स्थापित होने वाले अध्ययन केंद्र में कई भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाओं को भी शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय में इस समय 50 फीसदी सीटें निशक्त अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित हैं।
कार्यपरिषद बैठक में इसके साथ ही बहु विकलांगता अध्ययन केंद्र की स्थापना को भी मंजूरी दी गई। बहु विकलांगता अध्ययन केंद्र स्थापित होने के बाद बहु निशक्तता से पीड़ित लोगों पर शोध के साथ ही इलाज और उनके पुनर्वास के लिए भी काम किया जाएगा।
कार्य परिषद बैठक में विश्वविद्यालय में पीएचडी शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय में अगले सत्र से पीएचडी में एडमिशन शुरू किए जाएंगे।
बैठक में कुलपति के साथ ही कुलसचिव अखिलेंद्र कुमार, उच्च शिक्षा विभाग से गीता मिश्रा और प्रो. एपी तिवारी के साथ ही अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
विदेशी छात्रों के लिए स्थापित होगा विशेष सेल
विश्वविद्यालय में विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए विशेष सेल का गठन किया जाएगा। इस प्रस्ताव को भी कार्यपरिषद बैठक में मंजूरी प्रदान की गई।
सेल के गठन के बाद इसके सदस्य इस बात के लिए प्रयास करेंगे कि कैसे ज्यादा से ज्यादा विदेशी छात्रों को अध्ययन के लिए आकर्षित किया जाएगा। विदेशी छात्रों को पढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय आईसीसीआर से भी संबद्धता लेगा।
यूजीजी की गाइडलाइन के हिसाब से होंगी नियुक्तियां और प्रमोशन
डॉ. शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में नियुक्तियां और कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत होने वाले शिक्षकों के प्रमोशन यूजीसी नियमन 2010 के अनुसार होंगे।
सचिव विकलांग कल्याण अनिल कुमार सागर ने इस संबंध में गुरुवार को शासनादेश जारी कर दिया है। विश्वविद्यालय के कुलपति को संबोधित पत्र में कहा गया है कि शासनादेश के हिसाब से विश्वविद्यालय की परिनियमावली में 15 दिन में परिवर्तन कर लिया जाए।
शासनादेश में महिला शिक्षकों के लिए प्रसूति अवकाश के दिनों में बढ़ोत्तरी करने की व्यवस्था भी दी गई है। शासनादेश के अनुसार विश्वविद्यालय पर अब यूजीसी नियमन 2010 के प्रावधान लागू होंगे।
प्रावधान शिक्षकों की नियुक्ति ओर प्रमोशन के संबंध में प्रभावी होंगे लेकिन विश्वविद्यालय में एससी एसटी और विकलांगता से पीड़ित अभ्यर्थियों के मामले में शिक्षक भर्ती के समय पीजी में पांच प्रतिशत अंक की छूट व्यवस्था पहले की तरह लागू होगी।
अंकों में पांच प्रतिशत छूट की व्यवस्था स्नातक स्तर पर भी लागू होगी। शासनादेश के अनुसार विश्वविद्यालय की महिला शिक्षकों को अब 135 के बजाय 180 दिनों का प्रसूति अवकाश मिलेगा।
यह अवकाश सेवाकाल के दौरान दो बार लिए जा सकेंगे। महिला शिक्षक बच्चे के पालन-पोषण के लिए 730 दिनों का मातृत्व अवकाश ले सकेंगी। विश्वविद्यालय में 180 दिन कक्षाएं चलाने के लिए भी निर्देशित किया गया है।
शासनादेश में सप्ताह में छह दिन कक्षाओं के हिसाब से विश्वविद्यालय में 30 सप्ताह कक्षाएं चलाने तथा 12 सप्ताह एडमिशन आदि प्रक्रिया के लिए निर्धारित किए गए हैं।
इन प्रावधानों के लिए विश्वविद्यालय की परिनियमावली में परिवर्तन करने के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है।