प्रवेश की प्रक्रिया बदलेगा लखनऊ विश्वविद्यालय

आशीष त्रिवेदी/लखनऊ Updated Sat, 26 Oct 2013 02:29 AM IST
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lucknow university will conduct entrance for admission

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लखनऊ विश्वविद्यालय में अगले शैक्षिक सत्र से स्नातक व परास्नातक कक्षाओं में दाखिले मेरिट के बजाय प्रवेश परीक्षा से किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हुई प्रवेश समिति की बैठक में प्रवेश परीक्षा से दाखिला लेने की संभावनाओं को टटोलने के लिए एक कमेटी का गठन करने का विचार किया गया।
यह कमेटी देखेगी कि मेरिट व प्रवेश परीक्षा से दाखिला लेने में क्या नफा और नुकसान हैं। कमेटी इसकी विस्तृत रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही इस मसले पर छात्र संगठनों की भी राय ली जाएगी।
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दरअसल यह मामला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने उठाया है और विवि प्रशासन से मांग की है कि मेरिट की बजाय प्रवेश परीक्षा से दाखिला लें तो अच्छा होगा।

प्रवेश समिति की बैठक में इस मुद्दे पर काफी देर बहस हुई कि दाखिला मेरिट से लिया जाय या प्रवेश परीक्षा के माध्यम से।

एलयू में कुछ पॉपुलर कोर्सों को छोड़ दें तो बाकी सभी में दाखिले की मेरिट शुरुआत से ही काफी ऊंची होती है। लेकिन बाद में काफी नीचे आ जाती है।

इतना ही नहीं मेरिट नीचे गिराने के बावजूद सीटें नहीं भर पाती हैं। लविवि के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय के मुताबिक दाखिला प्रवेश परीक्षा से हो या मेरिट से इस पर अंतिम फैसला कमेटी ही करेगी।

अर्थशास्त्र की पूर्व शोध छात्रा अर्चना चौधरी ने 5 जुलाई 2001 में प्रवेश लिया था। लेकिन 12 वर्ष से अधिक का समय बीतने के बावजूद वे पीएचडी पूरी नहीं कर पाईं।

इसी तरह पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग के पूर्व शोध छात्र अंजनी कुमार ने 30 मार्च 2001 को पीएचडी में दाखिला लिया था। उनकी भी पीएचडी पूरी नहीं हो पाई है।

एंथ्रोपोलॉजी विभाग की पूर्व शोध छात्रा ने 24 जनवरी 2002 को पीएचडी में रजिस्ट्रेशन करवाया था और अभी तक यह भी पीएचडी पूरी नहीं कर पायीं।

इन तीनों के प्रकरण में एलयू प्रशासन ने इन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन न देने का फैसला किया है।

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नियमानुसार 7 वर्ष में पीएचडी पूरी करनी होती है। विशेष परिस्थितियों में दो वर्ष की मोहलत देने का ही प्रावधान है।

बैठक के दौरान 27 स्टूडेंट को उनकी मांग के अनुसार एक से दूसरे कॉलेज में उसी कोर्स में ट्रांसफर करने पर भी मुहर लगा दी गई।

अब फेल होने पर भी अगले सेमेस्टर में मिलेगा दाखिला
लविवि ने परास्नातक (पीजी) कोर्सों में एक सेमेस्टर फेल होने के बाद भी स्टूडेंट को अगले सेमेस्टर में दाखिला देने की छूट दे दी है।

उदाहरण के तौर पर अगर कोई स्टूडेंट एमए फर्स्ट सेमेस्टर पास कर लेता है लेकिन सेकंड सेमेस्टर में फेल हो जाता है तो भी उसे एमए तृतीय सेमेस्टर में दाखिला दे दिया जाएगा।

विवि प्रशासन के इस फैसले से हजारों छात्रों को फायदा होगा। विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले स्टूडेंट ने यह मांग कि थी कि उन्हें अगली कक्षा में प्रोन्नति देने की व्यवस्था की जाए।

प्रवेश समिति की बैठक में सभी सदस्यों ने इस पर अपनी सहमति जताई।

22 साल बाद अफजाल हुसैन पूरा करेंगे बीए
एलयू की प्रवेश समिति की बैठक में 43 ऐसे प्रकरणों पर भी विचार किया गया जो गैप होने के कारण पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं।

इसमें वर्ष 1991 में अफजाल हुसैन ने एलयू से बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पूरी की थी लेकिन वह आगे पढ़ाई नहीं कर पाए। अब इन्हें 22 वर्ष बाद बीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई पूरी करने की अनुमति विशेष परिस्थितियों में दी जा रही है।

इसी तरह कानपुर यूनिवर्सिटी से वर्ष 1990 में बीए करने वाली अनीता देवी को एपी सेन मेमोरियल पीजी कॉलेज में एमए हिंदी में दाखिले की अनुमति दी गई है।

वर्ष 2002 में बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पूरी करने वाली वंदना कुमारी को भी बीए तृतीय वर्ष की पढ़ाई पूरी करने की अनुमति दे दी गई।

इसी तरह किसी को छह वर्ष, किसी को पांच वर्ष के अंतराल के बाद आगे पढ़ाई करने की अनुमति दी गई है।

कई प्रकरणों को दोबारा परखा जाएगा
एलयू में स्टूडेंट के गैप होने के कारण अगली कक्षा में दाखिले के लिए विशेष अनुमति देने के कुछ मामले रजिस्ट्रार के अनुमोदन से प्रस्तुत कर दिए गए थे।

जबकि नियमानुसार प्रवेश समिति की बैठक में इन्हें कुलपति के अनुमोदन से ही पास करवाए जाने की व्यवस्था।

ऐसे में अब इसे रि-एग्जामिन कर कुलपति के अनुमोदन से पास करवाया जाएगा। ऐसे में अब प्रवेश समिति की बैठक में कुछ निर्णयों को दोबारा परखा जाएगा।
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