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अब केवल रट्टा मारने से नहीं चलेगा काम
सचिन त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Fri, 01 Nov 2013 01:14 AM IST
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रट्टा मारकर केवल कुछ सवालों के जवाब लिखकर परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स के लिए बुरी खबर है। लखनऊ विश्वविद्यालय अगले सत्र से परीक्षा प्रणाली में बदलाव करने जा रहा है।
अगले सत्र से लविवि की परीक्षा विस्तृत उत्तरीय के बजाय ऑब्जेक्टिव सवालों पर होगी। मुख्य परीक्षा सेमेस्टर के अंत में होगी। वहीं छात्रों की लेखन क्षमता का आंकलन सेमेस्टर के बीच में कर लिया जाएगा।
परीक्षा में सुधार के प्रयासों के तहत लविवि कुलपति प्रो. एसबी निमसे के मुताबिक अगले सत्र से नए पैटर्न पर परीक्षा होगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में अभी तक स्नातक और परास्नातक स्तर की परीक्षा विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित होती थी।
विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित परीक्षा में कुछ छात्र रटे-रटाए कुछ सवालों के जवाब लिखकर पास हो जाते हैं। पिछले काफी समय से लखनऊ विश्वविद्यालय में परीक्षा सुधारों पर विचार विमर्श किया जा रहा है।
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परीक्षा सुधार के तहत सहमति बनी है कि केवल विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों पर आधारित करने के बजाय परीक्षा के पैटर्न में कुछ बदलाव किया जाए। बदलाव के बाद अब परीक्षा में ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएंगे।
स्टूडेंट्स में विस्तृत उत्तरीय सवालों के जवाब लिखने की आदत बनी रहे इसलिए सेमेस्टर के बीच में विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित परीक्षा भी कराई जाएगी।
इस तरह स्टूडेंट्स का पूरा मूल्यांकन हो सकेगा। दोनों परीक्षाओं के अंक जोड़कर छात्रों का फाइनल रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा।
चार दिन में निकलेगा रिजल्ट
नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा रिजल्ट निकालने में होगा। लिखित परीक्षा की लाखों कॉपियां जांचने में शिक्षकों को महीनों लग जाते हैं।
ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर परीक्षा होने पर यह ओएमआर शीट में होगी। ओएमआर शीट को जांचने में मुश्किल से दो दिन लगेंगे। पूरा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होने के कारण रिजल्ट बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
इस तरह से परीक्षा देने के चार दिन बाद रिजल्ट निकल आएगा।
समय से चलेंगे सेमेस्टर
ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर परीक्षा होने के कारण रिजल्ट जल्दी निकलेगा। इसका सीधा असर सेमेस्टरों पर पड़ेगा। समय से रिजल्ट आने पर सारे सेमेस्टर समय से शुरू हो जाएंगे।
हर साल पीजी के सेमेस्टर रिजल्ट न आने की वजह से लेट हो जाते हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद इससे मुक्ति मिल जाएगी।
शिक्षक और स्टूडेंट दोनों करेंगे मेहनत
ऑब्जेक्टिव परीक्षा प्रणाली लागू होने शिक्षकों और स्टूडेंट्स दोनों मेहनत करनी होगी। अभी तक बिना पढ़ाए समय काटने वाले शिक्षक और बिना पढ़े पास होने वाले स्टूडेंट्स दोनों के लिए मुसीबत होगी।
नई परीक्षा प्रणाली लागू होने पर शिक्षकों को नई तरह का प्रश्नपत्र भी तैयार करना होगा। इसी तरह हर सवाल के जवाब देने में छात्रों को सतर्क रहना होगा। जरा से चूके नहीं कि नंबर गए।
ऐसा होगा पैटर्न
नए पैटर्न में 100 नंबर का प्रश्नपत्र दो भागों में बंटा होगा। पहला भाग विस्तृत उत्तरीय परीक्षा का होगा जबकि दूसरा भाग ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर।
आमतौर पर विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों पर आधारित भाग 40 और ऑब्जेक्टिव सवालों पर आधारित भाग 60 नंबरों का होता है। विश्वविद्यालय इसे 50-50 नंबर का कर सकता है।
सेमेस्टर के बीच में विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित परीक्षा होगा। यह परीक्षा केंद्रीकृत होने के बजाय विभागीय स्तर पर होगी। दूसरी ओर ऑब्जेक्टिव सवालों पर आधारित परीक्षा मुख्य परीक्षा होगी।
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अगले सत्र से लविवि की परीक्षा विस्तृत उत्तरीय के बजाय ऑब्जेक्टिव सवालों पर होगी। मुख्य परीक्षा सेमेस्टर के अंत में होगी। वहीं छात्रों की लेखन क्षमता का आंकलन सेमेस्टर के बीच में कर लिया जाएगा।
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परीक्षा में सुधार के प्रयासों के तहत लविवि कुलपति प्रो. एसबी निमसे के मुताबिक अगले सत्र से नए पैटर्न पर परीक्षा होगी।
लखनऊ विश्वविद्यालय में अभी तक स्नातक और परास्नातक स्तर की परीक्षा विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित होती थी।
विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित परीक्षा में कुछ छात्र रटे-रटाए कुछ सवालों के जवाब लिखकर पास हो जाते हैं। पिछले काफी समय से लखनऊ विश्वविद्यालय में परीक्षा सुधारों पर विचार विमर्श किया जा रहा है।
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परीक्षा सुधार के तहत सहमति बनी है कि केवल विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों पर आधारित करने के बजाय परीक्षा के पैटर्न में कुछ बदलाव किया जाए। बदलाव के बाद अब परीक्षा में ऑब्जेक्टिव सवाल पूछे जाएंगे।
स्टूडेंट्स में विस्तृत उत्तरीय सवालों के जवाब लिखने की आदत बनी रहे इसलिए सेमेस्टर के बीच में विकेंद्रीकृत व्यवस्था के तहत विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित परीक्षा भी कराई जाएगी।
इस तरह स्टूडेंट्स का पूरा मूल्यांकन हो सकेगा। दोनों परीक्षाओं के अंक जोड़कर छात्रों का फाइनल रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा।
चार दिन में निकलेगा रिजल्ट
नई प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा रिजल्ट निकालने में होगा। लिखित परीक्षा की लाखों कॉपियां जांचने में शिक्षकों को महीनों लग जाते हैं।
ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर परीक्षा होने पर यह ओएमआर शीट में होगी। ओएमआर शीट को जांचने में मुश्किल से दो दिन लगेंगे। पूरा सिस्टम कंप्यूटराइज्ड होने के कारण रिजल्ट बनाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।
इस तरह से परीक्षा देने के चार दिन बाद रिजल्ट निकल आएगा।
समय से चलेंगे सेमेस्टर
ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर परीक्षा होने के कारण रिजल्ट जल्दी निकलेगा। इसका सीधा असर सेमेस्टरों पर पड़ेगा। समय से रिजल्ट आने पर सारे सेमेस्टर समय से शुरू हो जाएंगे।
हर साल पीजी के सेमेस्टर रिजल्ट न आने की वजह से लेट हो जाते हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद इससे मुक्ति मिल जाएगी।
शिक्षक और स्टूडेंट दोनों करेंगे मेहनत
ऑब्जेक्टिव परीक्षा प्रणाली लागू होने शिक्षकों और स्टूडेंट्स दोनों मेहनत करनी होगी। अभी तक बिना पढ़ाए समय काटने वाले शिक्षक और बिना पढ़े पास होने वाले स्टूडेंट्स दोनों के लिए मुसीबत होगी।
नई परीक्षा प्रणाली लागू होने पर शिक्षकों को नई तरह का प्रश्नपत्र भी तैयार करना होगा। इसी तरह हर सवाल के जवाब देने में छात्रों को सतर्क रहना होगा। जरा से चूके नहीं कि नंबर गए।
ऐसा होगा पैटर्न
नए पैटर्न में 100 नंबर का प्रश्नपत्र दो भागों में बंटा होगा। पहला भाग विस्तृत उत्तरीय परीक्षा का होगा जबकि दूसरा भाग ऑब्जेक्टिव पैटर्न पर।
आमतौर पर विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों पर आधारित भाग 40 और ऑब्जेक्टिव सवालों पर आधारित भाग 60 नंबरों का होता है। विश्वविद्यालय इसे 50-50 नंबर का कर सकता है।
सेमेस्टर के बीच में विस्तृत उत्तरीय सवालों पर आधारित परीक्षा होगा। यह परीक्षा केंद्रीकृत होने के बजाय विभागीय स्तर पर होगी। दूसरी ओर ऑब्जेक्टिव सवालों पर आधारित परीक्षा मुख्य परीक्षा होगी।