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एलयू में गुरुजी को रास आती है ‘अफसरी’

Sun, 13 Apr 2014 08:51 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 13 Apr 2014 08:51 AM IST
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lucknow university teachers are not intrested in teaching

एलयू में फाइनेंस ऑफिसर का पद लंबे समय से कॉमर्स फैकल्टी के प्रोफेसर ए चटर्जी के पास है। इससे पहले भी इस पद पर कई बार टीचर काम कर चुके हैं।

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प्रशासनिक अधिकारी का यह पद शासन के अफसर के पास होना चाहिए लेकिन एलयू में शासन की ओर से अफसर भेजने में जहां देरी हुई, इस पद पर शिक्षक नियुक्त कर दिया जाता है।
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इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन इस बात पर अधिक दिलचस्पी नहीं लेता कि शासन की ओर से जल्दी कोई अधिकारी भेजा जाए। यही कारण है कि बीते कई महीनों से यह पद शिक्षक के पास ही है।
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परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की जिम्मेदारी के लिए ओएसडी (मूल्यांकन एवं परिणाम) किसी न किसी गुरुजी को ही बनाया जाता है।

हर बार बीए, बीएससी व बीकॉम में यह अलग-अलग ओएसडी होते थे इस बार एलयू प्रशासन ने यह पूरा जिम्मा हिंदी विभाग के प्रोफेसर को ही सौंपा।

पहले भी हमेशा यह पद शिक्षक के पास ही रहा, जबकि कॉपियों को जंचवाने और फिर रिजल्ट तैयार करवाने में परीक्षा विभाग के स्टॉफ से भी करवाया जा सकता है।

लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन परीक्षा नियंत्रक की तरह ही यह जिम्मा भी किसी न किसी शिक्षक को ही देता है। यह उदाहरण बानगी हैं जो बताते हैं कि एलयू में किस तरह पढ़ाई व रिसर्च करवाने के अलावा अन्य प्रशासनिक पदों को लेने में पीछे नहीं हटते।

एलयू के कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी किसी प्रशासनिक अधिकारी को देने के लिए शासन को पत्र लिखा है।

हाईकोर्ट के सख्त निर्देश हैं कि परीक्षा विभाग का जिम्मा प्रशासनिक अधिकारी के पास ही हो। कुलपति ने ऐसा इसलिए किया कि अब प्रदेश में सिर्फ एलयू ही ऐसी यूनिवर्सिटी बची है, जहां पर परीक्षा नियंत्रक की कुर्सी गुरुजी के पास है।

इसके अलावा और भी पद हैं, जहां पर शिक्षक पढ़ाई व रिसर्च के साथ-साथ प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त रहते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन भी इस बात पर ध्यान नहीं देता कि गुरुजी के प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त होने पर पढ़ाई व रिसर्च प्रभावित हो सकता है।

यूनिवर्सिटी प्रशासन को बीती पांच मई, 2009 को उच्च शिक्षा विभाग की ओर से पत्र भेजा गया इसमें साफ लिखा है कि विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों से प्रशासनिक, कार्यालयी और वित्तीय मामलों का निष्पादन न करवाया जाए।

क्योंकि इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता का हस होता है और पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित होती है। मगर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इससे पहले भी कई बार पत्र आए मगर उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। यूनिवर्सिटी में प्रवेश प्रक्रिया के काम में भी बड़ी संख्या में शिक्षक ही ड्यूटी पर लगाए जाते हैं।


भले ही वे व्यस्त होने के कारण ढंग से पढ़ाई न करवा पाएं लेकिन उन्हें यह जिम्मा सौंपा जाता है। फिलहाल, इस मामले में एलयू प्रशासन कुछ भी साफ-साफ कहने से बच रहा है।

एलयू ने कार्य अधीक्षक निर्माण पद गुरुजी के लिए बनाया
लखनऊ विश्वविद्यालय के एक्ट में कार्य अधीक्षक निर्माण का पद किसी न किसी शिक्षक के पास ही रहेगा, ऐसा प्रावधान किया गया है।

इंजीनियरों की मॉनीटरिंग का जिम्मा गुरुजी के पास ही रहता है। पेयजल, सीवर की समस्या और निर्माण व मरम्मत संबंधित कार्यों में गुरुजी ही अधिक पसीना बहाते हैं।

कक्षाएं व रिसर्च का काम करने के साथ ही उन्हें दिन-रात इस कार्य में भी खूब मेहनत करनी होती है।

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