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LU: दिए जा रहे मनगढ़ंत एनरोलमेंट नंबर
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 05 Feb 2014 10:08 AM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय में बिना एनरोलमेंट नंबर के ही सैकड़ों स्टूडेंट्स को डिग्री बांटे जाने के मामले का खुलासा होने के बाद परीक्षा विभाग के क्लर्क मामले की लीपापोती में जुट गए हैं।
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अब जो छात्र एनरोलमेंट नंबर के लिए आवेदन कर रहे हैं उन्हें बाबू अपने मन से छात्रों के परीक्षा पास होने के वर्ष के अनुसार एनरोलमेंट नंबर दे रहे हैं। इसके लिए बाकायदा बाबुओं ने मनगढ़ंत सीरीज भी बना ली है।
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वर्ष 1996 से वर्ष 2006 तक सबसे अधिक एनरोलमेंट नंबर मिसिंग हैं। अगर किसी छात्र ने वर्ष 1998 में बीएससी की है। तो उसे एससी/2221/1998 नंबर बनाकर दिया जा रहा है।
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इसके बाद दूसरे स्टूडेंट को उसके आगे का नंबर दिया जा रहा है। लेकिन ये एनरोलमेंट नंबर सिर्फ हाथी के दांत के दिखावे जैसे ही हैं। इनके आधार पर स्टूडेंट्स का लविवि में कोई रिकॉर्ड मेनटेन नहीं किया जा रहा है।
केवल छात्रों की संतुष्टि के लिए नंबर दिए जा रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय में बीते सात वर्षों से ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मगर कॉलेजों से परीक्षा फॉर्म व एनरोलमेंट नंबर अब भी मैनुवल भरवाया जा रहा है।
ग्रेजुएशन व पीजी सहित विभिन्न कोर्सेज में फर्स्ट ईयर में एनरोलमेंट फॉर्म परीक्षा फॉर्म के साथ भरवाया जाता है। जबकि नियम के मुताबिक दाखिला लेने के साथ ही स्टूडेंट को एनरोलमेंट नंबर मिलना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार बीते वर्षों में कॉलेजों में क्षमता से अधिक प्रवेश होने के मामले सामने आए हैं। हालांकि एलयू में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को ऑनलाइन काउंसलिंग में भरे डाटा के अनुसार एनरोलमेंट नंबर और प्रवेशपत्र जारी कर दिया जाता है।
लेकिन बीते वर्षों में यहां भी एनरोलमेंट नंबर में लापरवाही की गई। हाल यह है कि बीए ऑनर्स द्वितीय व तृतीय वर्ष के स्टूडेंट्स के पास एनरोलमेंट नंबर तक नहीं हैं। डिग्री कॉलेजों का तो और भी बुरा हाल है।
लविवि के परीक्षा विभाग में कॉलेजों से जो परीक्षा फॉर्म व एनरोलमेंट फॉर्म भरकर आते हैं उसके साथ कॉलेज स्टूडेंट्स की सूची भी भेजता है।
परीक्षा विभाग में क्लर्क एनरोलमेंट फॉर्म के अनुसार एक सीरीज बनाकर एनरोलमेंट नंबर अलॉट करता है। कॉलेज जो सीडी भेजता है उस पर केवल छात्र का ब्यौरा होता है। बाद में इन मैनुअल फॉर्म को देखकर ही मॉर्क्सशीट पर एनरोलमेंट नंबर दे दिए जाते हैं।
एनरोलमेंट नंबर से ही पहचान
एनरोलमेंट नंबर से ही स्टूडेंट्स की पहचान होती है। दूसरे संस्थानों व अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में दाखिला लेने पर सबसे पहले एनरोलमेंट नंबर ही पूछा जाता है। सरकारी नौकरी में भी सत्यापन के समय स्टूडेंट्स की मार्क्सशीट पर एनरोलमेंट नंबर ही देखा जाता है।
पोल खुलने का डर
इस बार एलयू ने सभी कॉलेजों में सीटों के मुकाबले हुए दाखिले का ब्यौरा ऑनलाइन करने की घोषणा की थी। लेकिन कुछ दिन बाद ही उसकी घोषणा फुस्स हो गई।
दरअसल अगर परीक्षा फॉर्म व एनरोलमेंट फॉर्म ऑनलाइन भरवा लिए जाएं तो कॉलेजों में सीटों से अधिक हुए दाखिलों की पोल खुल सकती है। लेकिन एडमिशन में घालमेल करने के चक्कर में एलयू इससे कदम पीछे खींच रहा है।