बीपीएड के स्टूडेंट्स को झटका दे सकती है ये खबर
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लखनऊ विश्वविद्यालय में इस साल बीपीएड कोर्स चला पाना मुश्किल हो रहा है जबकि, विश्वविद्यालय इस कोर्स के लिए पहले ही आवेदन प्रक्रिया पूरी कर चुका है। वहीं कॉलेजों में भी बीपीएड की पढ़ाई को लेकर संकट बरकरार है।
उनके यहां प्रवेश हुए लगभग डेढ़ माह हो चुके हैं लेकिन छात्र-छात्राओं को क्या सिलेबस पढ़ाया जाना है यह किसी को नहीं पता। इतना ही नहीं कॉलेजों को यह भी जानकारी नहीं है कि विश्वविद्यालय वार्षिक पद्घति से परीक्षा कराएगा या सेमेस्टर।
फिलहाल इस समस्या का समाधान जल्द होता दिखाई नहीं दे रहा है। ऐसे में बीपीएड को लेकर सवालिया निशान लग गया है।
एनसीटीई ने मानक पूरे न होने की बात कहते हुए 2013 में एलयू में बीपीएड की पढ़ाई पर रोक लगा दी थी। इस सत्र में एनसीटीई ने विश्वविद्यालय को राहत देते हुए बीपीएड पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति दी है। लेकिन वर्तमान सत्र से ही बीपीएड के पैटर्न को बदला भी गया है।
सेमेस्टर से पढ़ाई की उम्मीद
अब यह कोर्स एक साल की जगह दो साल का है। विश्वविद्यालयों को यह छूट दी गई कि वे अपने अनुसार यह तय कर लें कि इस कोर्स की परीक्षाएं वार्षिक होंगी या सेमेस्टर। इसके बाद विश्वविद्यालय ने बिना नए सिलेबस और पैटर्न को अंतिम रूप दिए इस कोर्स में आवेदन ले लिए।
इसके बाद 23 अगस्त को विश्वविद्यालय में बीपीएड की बोर्ड ऑफ स्टडीज ने निर्णय लिया कि यहां वार्षिक पद्घति से परीक्षा कराई जाएगी। लेकिन इस निर्णय के बाद एनसीटीई की गाइड लाइंस को जब दोबारा देखा गया तो सामने आया कि बीपीएड में चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू किया जाना जरूरी है।
बीपीएड का सिलेबस और पैटर्न तय न होने से कॉलेजों को भी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। विश्वविद्यालय से संबद्घ सात कॉलेजों में बीपीएड की पढ़ाई होती है। यहां प्रवेश तो जुलाई में ही हो गए लेकिन अभी तक ठीक से पढ़ाई नहीं हो पा रही। कॉलेज मजबूरी में एनसीटीई द्वारा दिए गए मॉडल सिलेबस से पढ़ाकर काम चला रहे हैं।
बीपीएड न चलाने पर हो रहा विचार
विश्वविद्यालय में इस साल बीपीएड की 50 सीटों के लिए लगभग 130 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। अभी विश्वविद्यालय को नए सिरे से बीपीएड के सिलेबस और पैटर्न तय करने में कुछ समय लगना तय है।
इसके अलावा एनसीटीई ने एक तरफ तो विश्वविद्यालय में बीपीएड की पढ़ाई पर लगाई रोक को खत्म किया है जिसके अनुसार वह इस सत्र से प्रवेश ले सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनको 2016-17 से प्रवेश की अनुमति दी है।
सूत्रों की मानें तो इसे लेकर भी अभी स्थिति स्पष्ट नहीं कि विश्वविद्यालय इस साल अपने यहां प्रवेश ले या नहीं। इन सभी समस्याओं के समाधान से पहले विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया भी पूरी नहीं करेगा। सूत्रों की मानें तो इन स्थितियों को देखते हुए अब विश्वविद्यालय इस सत्र में भी अपने यहां बीपीएड न चलाने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा होता है तो आवेदकों को बड़ा झटका लगेगा। अब सभी जगह प्रवेश प्रक्रिया खत्म हो चुकी है।
18 सितंबर को एकेडमिक काउंसिल की बैठक में बीपीएड के सिलेबस और पैटर्न पर निर्णय लिया जाएगा। सिलेबस और पैटर्न एनसीटीई की गाइडलाइंस को तैयार करके ही तय किया जा रहा है। इसके बाद इनकी कॉपी सभी कॉलेजों को दे दी जाएगी।
- प्रो. एनके पांडेय, प्रवक्ता, लखनऊ विश्वविद्यालय