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एलयू में क्लास बंक करने पर नहीं मिलता पनिशमेंट
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Sat, 02 Nov 2013 01:16 AM IST
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पीजी की सेमेस्टर परीक्षाओं में अगले सत्र से परिवर्तन किया जा रहा है। इसमें लिखित के साथ-साथ ऑब्जेक्टिव परीक्षा होगी और क्लासरूम टेस्ट भी।
मगर 75 प्रतिशत उपस्थिति को अनिवार्य रूप से लागू करवाने के लिए यहां कोई सख्ती नहीं है। नियमानुसार उपस्थिति पूरी न करने पर स्टूडेंट परीक्षा में नहीं बैठ सकता है।
लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में यह नियम सिर्फ कागजों पर है। टीचर्स क्लास रेग्युलर पढ़ा रहे हैं इसका ब्यौरा भी कुलपति के पास नहीं जा रहा था। अब इसको लेकर दोबारा आदेश जारी हुए हैं।
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दूसरी ओर राजधानी में खुली ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी व शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी इस मामले में काफी सख्त हैं। यहां उपस्थिति पूरी किए बिना स्टूडेंट परीक्षा में बैठ नहीं सकता है।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सैय्यद हैदर के मुताबिक यूनिवर्सिटी का यह पहला सत्र है। यहां स्नातक व परास्नातक की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसंबर में होंगी।
स्टूडेंट्स को सख्त निर्देश हैं कि वे परीक्षा में तभी बैठ पाएंगे जब उपस्थिति पूरी होगी। सेमेस्टर परीक्षाओं में दस अंक उपस्थिति के हैं। इसमें स्टूडेंट 75 प्रतिशत न्यूनतम उपस्थिति पर ही अंक पाएगा।
इसके ऊपर उसके जैसे-जैसे परफॉर्म करेगा वैसे नंबर मिलेंगे। उप्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. बृजेन्द्र सिंह के मुताबिक यूनिवर्सिटी में वही स्टूडेंट परीक्षा में बैठ सकता है जिसकी 85 प्रतिशत उपस्थिति हो।
हालांकि विशेष परिस्थितियों में छात्र को छूट दी जा सकती है जब उसके साथ कोई हादसा हो जाए तब ही। डॉ. सिंह ने बताया कि बीते सालों में सिर्फ एक ऐसा केस था जिसमें बीएड की छात्रा उपस्थिति पूरी नहीं कर पाई थी।
क्योंकि उसके भाई की हत्या कर दी गई थी और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। डॉ. बृजेंद्र सिंह कहते हैं कि अगर स्टूडेंट उपस्थित ही नहीं होगा तो उसे परीक्षा में अच्छे अंक कैसे मिलेंगे।
दूसरी ओर लखनऊ विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध 118 डिग्री कॉलेजों में 75 प्रतिशत उपस्थिति सिर्फ कागजों पर ही अनिवार्य है। यहां परीक्षा से पहले आज तक कभी स्टूडेंट को उपस्थिति पूरी न होने पर नहीं रोका गया।
एलयू में शिक्षकों की प्रतिदिन उपस्थिति का ब्यौरा विभागाध्यक्षों के माध्यम से संकाय अध्यक्षों और कुलपति को भेजने की व्यवस्था की गई है लेकिन वह बीच-बीच में ठप हो जाती है।
हालांकि एलयू प्रशासन ने बीते हफ्ते फिर से शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से भेजने के लिए विभागाध्यक्षों को पत्र लिखा है।
नेशनल में अटेंडेंस पर जुड़ते हैं नंबर
राजधानी में एकमात्र स्वायत्त कॉलेज नेशनल पीजी कॉलेज में उपस्थिति पर सख्ती होती है। यहां परीक्षाओं में उपस्थिति के अंक जुड़ते हैं। कॉलेज प्रशासन ने ऐसा सिस्टम डवलप कर दिया है कि स्टूडेंट को हर दिन कॉलेज आना ही होगा।
वहीं नवयुग पीजी कॉलेज में भी 75 प्रतिशत उपस्थिति पर सख्ती की जाती है। यहां हर साल वार्षिक परीक्षा के समय कम उपस्थिति वाली छात्राओं के प्रवेश पत्र रोक दिए जाते हैं। एलयू में नियम को सख्ती से न लागू करवाने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न होती है।
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मगर 75 प्रतिशत उपस्थिति को अनिवार्य रूप से लागू करवाने के लिए यहां कोई सख्ती नहीं है। नियमानुसार उपस्थिति पूरी न करने पर स्टूडेंट परीक्षा में नहीं बैठ सकता है।
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लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में यह नियम सिर्फ कागजों पर है। टीचर्स क्लास रेग्युलर पढ़ा रहे हैं इसका ब्यौरा भी कुलपति के पास नहीं जा रहा था। अब इसको लेकर दोबारा आदेश जारी हुए हैं।
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दूसरी ओर राजधानी में खुली ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी व शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी इस मामले में काफी सख्त हैं। यहां उपस्थिति पूरी किए बिना स्टूडेंट परीक्षा में बैठ नहीं सकता है।
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक प्रो. सैय्यद हैदर के मुताबिक यूनिवर्सिटी का यह पहला सत्र है। यहां स्नातक व परास्नातक की प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं दिसंबर में होंगी।
स्टूडेंट्स को सख्त निर्देश हैं कि वे परीक्षा में तभी बैठ पाएंगे जब उपस्थिति पूरी होगी। सेमेस्टर परीक्षाओं में दस अंक उपस्थिति के हैं। इसमें स्टूडेंट 75 प्रतिशत न्यूनतम उपस्थिति पर ही अंक पाएगा।
इसके ऊपर उसके जैसे-जैसे परफॉर्म करेगा वैसे नंबर मिलेंगे। उप्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. बृजेन्द्र सिंह के मुताबिक यूनिवर्सिटी में वही स्टूडेंट परीक्षा में बैठ सकता है जिसकी 85 प्रतिशत उपस्थिति हो।
हालांकि विशेष परिस्थितियों में छात्र को छूट दी जा सकती है जब उसके साथ कोई हादसा हो जाए तब ही। डॉ. सिंह ने बताया कि बीते सालों में सिर्फ एक ऐसा केस था जिसमें बीएड की छात्रा उपस्थिति पूरी नहीं कर पाई थी।
क्योंकि उसके भाई की हत्या कर दी गई थी और उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया था। डॉ. बृजेंद्र सिंह कहते हैं कि अगर स्टूडेंट उपस्थित ही नहीं होगा तो उसे परीक्षा में अच्छे अंक कैसे मिलेंगे।
दूसरी ओर लखनऊ विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध 118 डिग्री कॉलेजों में 75 प्रतिशत उपस्थिति सिर्फ कागजों पर ही अनिवार्य है। यहां परीक्षा से पहले आज तक कभी स्टूडेंट को उपस्थिति पूरी न होने पर नहीं रोका गया।
एलयू में शिक्षकों की प्रतिदिन उपस्थिति का ब्यौरा विभागाध्यक्षों के माध्यम से संकाय अध्यक्षों और कुलपति को भेजने की व्यवस्था की गई है लेकिन वह बीच-बीच में ठप हो जाती है।
हालांकि एलयू प्रशासन ने बीते हफ्ते फिर से शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से भेजने के लिए विभागाध्यक्षों को पत्र लिखा है।
नेशनल में अटेंडेंस पर जुड़ते हैं नंबर
राजधानी में एकमात्र स्वायत्त कॉलेज नेशनल पीजी कॉलेज में उपस्थिति पर सख्ती होती है। यहां परीक्षाओं में उपस्थिति के अंक जुड़ते हैं। कॉलेज प्रशासन ने ऐसा सिस्टम डवलप कर दिया है कि स्टूडेंट को हर दिन कॉलेज आना ही होगा।
वहीं नवयुग पीजी कॉलेज में भी 75 प्रतिशत उपस्थिति पर सख्ती की जाती है। यहां हर साल वार्षिक परीक्षा के समय कम उपस्थिति वाली छात्राओं के प्रवेश पत्र रोक दिए जाते हैं। एलयू में नियम को सख्ती से न लागू करवाने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न होती है।