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एलयू हर साल डकार रहा 16.80 लाख रुपये
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Fri, 25 Oct 2013 02:40 AM IST
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राजधानी की सबसे पुरानी लखनऊ यूनिवर्सिटी छात्रों की सुरक्षा के प्रति कतई फिक्रमंद नहीं है।
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यहां स्टूडेंट एक्सीडेंट रिफंड फंड के नाम पर छात्रों से प्रीमियम की राशि तो जमा कराई जा रही है।
लेकिन इसका कोई लाभ उन्हें नहीं मिल रहा। इस फंड में हर वर्ष आने वाले 16.80 लाख रुपये लविवि प्रशासन अपनी जेब में रख रहा है।
जबकि डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी छात्रों के कॅरिअर के साथ उनकी जिंदगी के लिए भी सजग है।
यहां पढ़ने वाले सभी छात्रों का तीन लाख रुपये का बीमा कराया जाता है। स्टूडेंट की असमय मृत्यु होने पर ये रकम उसके घरवालों को देने का प्रावधान है।
वहीं जीबीटीयू में यदि किसी छात्र के अभिभावक की मौत हो जाती है तो स्टूडेंट वेलफेयर फंड से उसे एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। इसके अलावा आगे की पूरी फीस का खर्च भी उठाया जाता है।
जिससे छात्र की पढ़ाई में धन की कमी आड़े न आए। उप्र विकलांग उद्धार डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार उनके यहां स्टूडेंट से 105 रुपये वार्षिक इंश्योरेंस प्रीमियम लिया जाता है।
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ग्रुप जनता पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से सभी छात्रों का बीमा करवाया गया है।
इसके तहत अगर पढ़ाई के दौरान किसी स्टूडेंट की मृत्यु हो जाए तो उसके परिवार वालों को 3 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
वहीं जीबीटीयू में स्टूडेंट वेलफेयर फंड में हर साल छात्रों से करीब 150 रुपये जमा करवाए जाते हैं। इसके एवज में छात्र के अभिभावक की मौत होने पर उसे एक लाख रुपये की आर्थिक मदद और छात्र के आगे की पढ़ाई की पूरी फीस भरी जाती है।
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जीबीटीयू प्रशासन का कहना है कि इस फंड हर साल कई छात्रों को मदद दी जाती है। इस फंड को बनाने का मकसद ही यह है कि छात्रों के साथ कोई अनहोनी होने पर उनकी पढ़ाई पर कोई असर न हो।
इससे छात्रों का पूरा कॅरिअर महफूज रहेगा। उधर, लखनऊ विश्वविद्यालय में एक्सीडेंट रिफंड फंड के नाम पर सभी छात्रों से हर साल 100-100 रुपये जमा कराए जाते हैं, लेकिन अभी तक छात्रों का बीमा नहीं कराया गया है।
जिन कोर्सों में वार्षिक फीस जमा होती है उसमें 100 रुपये और जिस कोर्स में सेमेस्टर सिस्टम लागू है, वहां हर छह महीने पर 50-50 रुपये जमा कराए जाते हैं। दो साल पहले एलयू ने इसका प्रपोजल तैयार किया था।
एक्सिस बैंक, न्यू इंडिया इंश्योरेंस और एलआईसी से प्रस्ताव भी मांगे थे। उस समय 40 हजार रुपये की रकम सड़क एक्सीडेंट में होने घायल होने पर और 80 हजार रुपये की रकम छात्र की मृत्यु होने पर उसके घर वालों को देने का प्रस्ताव था।
तत्कालीन कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्रा ने बड़ी मशक्कत से इस प्रपोजल को तैयार कराया, लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस समय एलयू में करीब 16,800 छात्र हैं।
इस हिसाब से विश्वविद्यालय हर साल करीब 16.80 लाख रुपये की रकम डकार रहा है। लेकिन छात्रों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है।
डॉ. शकुंतला मिश्रा यूनिवर्सिटी के डीन एकेडमिक्स प्रो. एपी तिवारी के मुताबिक हमारी यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स का इंश्योरेंस ग्रुप जनता पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत किया जा रहा है।
इसके तहत छात्र की मौत होने पर उसके परिवार वाले को तीन लाख रुपये की राशि देने का प्रावधान है। हमारे लिए स्टूडेंट की जिंदगी बहुत कीमती है, इसलिए हमने उनका इंश्योरेंस कराया है।
गौतमबुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार यूएस तोमर के मुताबिक हमारी यूनिवर्सिटी में हर साल स्टूडेंट वेलफेयर फंड से करोड़ों रुपये की सहायता छात्रों को दी जाती है।
बीते साल भी करीब 150 छात्रों को इसके तहत आर्थिक मदद दी गई। हम छात्रों के कॅरियर को लेकर पूरी तरह संजीदा हैं।
अगर उनके अभिभावक के साथ कोई हादसा हो जाए तो छात्रों को आर्थिक मदद दी जाती है। छात्र को एक लाख रुपये नगद और आगे की पढ़ाई का पूरा खर्च दिया जाता है।