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भुगतान के लिए तरस रहे लविवि के गेस्ट लेक्चर

Thu, 28 Nov 2013 01:42 AM IST
सचिन त्रिपाठी/लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/लखनऊ Updated Thu, 28 Nov 2013 01:42 AM IST
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lucknow university is not paying to guest lecturers

लखनऊ विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के अतिथि शिक्षकों को पिछले डेढ़ साल से पढ़ाने के बावजूद भुगतान नहीं दिया जा रहा है।

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समाज कार्य के अतिथि व विषय विशेषज्ञों ने भुगतान के लिए बाकायदा विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भी लिखा है। इसके बावजूद शिक्षकों का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

बीते वर्ष पूरे वर्ष पढ़ाने के बावजूद शिक्षकों को भुगतान नहीं किया गया। इस वर्ष भी अतिथि और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों ने पढ़ाना शुरू कर दिया है लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय ने उनके भुगतान की सुध नहीं ली है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार अगर विभाग में शिक्षक कम हैं या किसी विषय विशेषज्ञ की जरूरत है तो बाहर से विशेषज्ञ शिक्षकों को पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
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इसके लिए शिक्षकों को प्रति लेक्चर 225 रुपये की दर से भुगतान किया जाता है। अतिथि शिक्षकों को सेमेस्टर में अधिकतम 40 और साल भर में 80 क्लास पढ़ाने की अनुमति होती है।

इसी अवधि में शिक्षकों को अपना पूरा सिलेबस पढ़ाना होता है। प्रति लेक्चर बेहद कम दर होने और क्लास की अधिकतम सीमा काफी कम होने के कारण बहुत से शिक्षक लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ाने को तैयार नहीं होते हैं।

मान-मनौव्वल के बाद कुछ शिक्षक तैयार होते हैं तो उन्हें अनुमोदन से लेकर भुगतान तक के लिए परेशान किया जाता है। समाज कार्य विभाग में सबसे ज्यादा सेल्फ फाइनेंस और डिप्लोमा कोर्स चलते हैं।

इन कोर्सों के लिए नियमित शिक्षकों की नियुक्ति नहीं है। ऐसे में विभाग में पढ़ाने के लिए अतिथि प्रवक्ताओं का सहारा लिया जाता है।

यहां के आधा दर्जन से ज्यादा अतिथि एवं विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को पिछले वर्ष से अब तक भुगतान नहीं किया गया है। अतिथि शिक्षक कई बार भुगतान के लिए लविवि को पत्र लिख चुके हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

परीक्षा के बाद पढ़ाने का अनुमोदन
लखनऊ विश्वविद्यालय में समाज कार्य विभाग के अतिथि और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का अनुमोदन पिछले साल अप्रैल माह में किया गया था। नियम यह है कि शिक्षकों का अनुमोदन कक्षाएं शुरू होने से पहले होना चाहिए।

समाजकार्य विभाग ने शिक्षकों का नाम अनुमोदन के लिए अगस्त 2012 में ही भेज दिया था। पर पूरे साल इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षकों के अनुमोदन की सुध एलयू को अप्रैल माह में परीक्षा शुरू होने के बाद आई।


12 अप्रैल 2012 को शिक्षकों का अनुमोदन तो हो गया लेकिन उनके भुगतान के लिए लविवि प्रशासन की नींद नहीं टूटी है।

बिना अनुमोदन के पढ़ा रहे शिक्षक
विश्वविद्यालय के नियमों के मुताबिक अतिथि और विषय विशेषज्ञ शिक्षकों का हर वर्ष अनुमोदन होना चाहिए। इसके बाद ही शिक्षकों को क्लास लेने की अनुमति है।

शिक्षकों के अनुमोदन की फाइलें विश्वविद्यालय में महीनों लटकी रहती हैं। स्टूडेंट्स का नुकसान न हो इसलिए विभागाध्यक्ष अनुमोदन की राह देखे बिना गेस्ट फैकल्टी की क्लास लगा देते हैं। अनुमोदन की प्रक्रिया बाद में पूरी होती रहती है।


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