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लखनऊ विवि को दोबारा जांचनी होगी कॉपी
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Wed, 11 Dec 2013 02:07 AM IST
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति (एससी) आयोग ने एमबीए के छात्र विपिन कुमार की कॉपी दोबारा जांच कर रिपोर्ट भेजने के आदेश एलयू को दिए हैं।
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नेट उत्तीर्ण व चतुर्थ सेमेस्टर में 68 प्रतिशत अंक लाने वाले इस छात्र को दूसरे सेमेस्टर में एक विषय में लगातार फेल किया जा रहा है। एलयू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विवि में दोबारा कॉपियां जंचवाने का नियम नहीं है।
इस पर छात्र ने पिछले सालों के कई ऐेसे मामले पेश कर प्रस्तुत किया कि कई बार दोबारा कॉपियां जांची गईं हैं। एलयू की ओर से पक्ष रखने के लिए दो क्लर्क भेजे जाने पर आयोग ने सख्त नाराजगी जताई।
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चेतावनी दी कि जांच में विवि की ओर से अगर सहयोग नहीं बरता गया तो वारंट जारी किया जाएगा। 27 दिसंबर तक एलयू को छात्र की कॉपी दोबारा जंचवाकर आयोग को रिपोर्ट भेजनी होगी।
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विपिन कुमार ने एलयू में वर्ष 2010-11 में एमबीए में दाखिला लिया था। एमबीए की चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में उसने 68 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं लेकिन सेकेंड सेमेस्टर में मार्केटिंग मैनेजमेंट विषय में उसे फेल किया गया।
इस विषय के बैक पेपर में भी उसे दो बार अनुत्तीर्ण कर दिया गया। छात्र का कहना है कि उसे द्वेषवश फेल किया जा रहा है। अगर दोबारा कॉपी की जांच हो तो वह जरूर पास होगा।
इस पर एलयू से अपना पक्ष रखने के लिए क्लर्क कृष्ण कांत शुक्ला व सुनील कुमार पेश हुए। उन्होंने आयोग के सहायक निदेशक तरुण खन्ना को बताया कि लखनऊ विश्वविद्यालय के आर्डिनेंस में उत्तर पुस्तिका के दोबारा मूल्यांकन की व्यवस्था नहीं है।
इस पर विपिन ने साक्ष्य प्रस्तुत किए कि दिसंबर, 2008 में एमबीए की परीक्षा में कंज्यूमर बिहेवियर के स्टूडेंट अंजलि सिंह और अंकित त्रिपाठी को फेल कर दिया गया था।
इसके बाद कुलपति के आदेश पर कॉपियों की दोबारा जांच हुई, जिसमें दोनों पास हुए। इस पर कॉपी जांचने वाले डॉ. एसके कौशल व प्रो. जेके शर्मा को परीक्षा की कॉपियां जांचने से डिबार कर दिया गया।
वाणिज्य संकाय में प्रो. जेवी वैशम्पायन की ओर से जांची गईं 27 स्टूडेंट्स की कॉपियां भी दोबारा चेक हुईं। इसके बाद सभी स्टूडेंट पास हो गए। इतना ही नहीं आईटी कॉलेज की छात्राओं की कॉपियों की भी दोबारा जांच हुई है।
विधि संकाय के शिक्षकों की ओर से जांची गईं कॉपियों का भी दोबारा मूल्यांकन करवाया गया। इस पर क्लर्क कोई तर्क नहीं दे पाए और बार-बार आर्डिनेंस का ही हवाला देते रहे।
आयोग ने नाराजगी जताई कि उन्होंने विवि प्रशासन को नोटिस में साफ लिखा था कि इस मसले पर किसी भिज्ञ अधिकारी को भेजें।
विवि प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर वह आगे भी ऐसा रवैया रखेगा तो उसके खिलाफ वारंट जारी किया जा सकता है।
आयोग ने छात्र का रोल नंबर व शिक्षक के अंकों को हटकार किसी अन्य विवि के शिक्षक से दोबारा जांच करवाने के आदेश दिए। एलयू को कॉपी दोबारा जंचवाकर 27 दिसंबर तक आयोग को रिपोर्ट भेजनी होगी।