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एलयू को मिली बीएड प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी

Thu, 11 Dec 2014 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 11 Dec 2014 11:32 AM IST
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lucknow university got responsibility to conduct B-Ed entrance exam.

सूबे में बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2015 का आयोजन लखनऊ विश्वविद्यालय करेगा। शासन ने बुधवार को बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा करवाने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय को नामित करते हुए आदेश जारी कर दिया।

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विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार देवेंद्र पांडेय को बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का नोडल अधिकारी बनाया है। बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए विवि में अलग सेल बनाई जाएगी। जल्द ही विवि प्रशासन इसके लिए कोऑर्डिनेटर की नियुक्ति करेगा।
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विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि शासन की ओर से यूनिवर्सिटी को बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी दी गई है। शासन की ओर से इसका पत्र एलयू को मिल गया है। पिछले साल संयुक्त प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी को दी गई थी।

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एलयू को करने होंगे फुलप्रूफ इंतजाम

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बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2015 को साफ-सुथरे ढंग से आयोजित करवाना लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए बड़ी चुनौती होगा। 2010 में जब एलयू को बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी दी गई थी तो कदम-कदम पर गड़बड़ियां उजागर हुईं थीं।

यूनिवर्सिटी ने आगरा में जिस प्रिंटिंग प्रेस को पर्चा छापने की जिम्मेदारी दी थी, वहां से पर्चा लीक हो गया था। यही नहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन बीएड की इतनी बड़ी परीक्षा आयोजित करवा रहा था लेकिन उसने पेपर के दो सेट तैयार नहीं करवाए थे।

यही कारण है कि प्रवेश परीक्षा आयोजित होने के ठीक एक रात पहले जब इसकी जानकारी हुई तो सभी अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए। वह सिर्फ पेपर का इंश्योरेंस होने की बार-बार बात कर रहे थे। देर रात में हुए इस खुलासे के बाद आननफानन परीक्षा रद हुई लेकिन ज्यादातर अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों तक पहुंच गए थे।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की अदूरदर्शिता के कारण परीक्षा केंद्रों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति भी खराब हो गई थी। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2010 का पर्चा लीक होने से पहले लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन से एक और बड़ी चूक हो चुकी थी।

कुछ इस तरह हुई थी धांधली

lucknow university got responsibility to conduct B-Ed entrance exam.
उसने ओबीसी के अभ्यर्थियों के लिए आवेदन करने की अर्हता स्नातक में 45 प्रतिशत अंक निर्धारित कर दी थी, जबकि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) ने सामान्य के साथ ओबीसी की अर्हता भी 50 प्रतिशत अंक ही स्नातक में तय की थी।

उस समय तत्कालीन रजिस्ट्रार जीपी त्रिपाठी बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के नोडल अधिकारी थे। तत्कालीन कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्रा को अदूरदर्शी टीम के कारण दो बार शर्मसार होना पड़ा।

यहां तक ही उन्होंने परीक्षा का पर्चालीक होने पर नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राज्यपाल को इस्तीफा भी दिया था, हालांकि राजभवन ने इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद उन्होंने परीक्षा में काफी सख्त इंतजाम करके दोबारा संयुक्त प्रवेश परीक्षा करवाई थी।

उस समय बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के समन्वयक शिक्षाशास्त्र विभाग के प्रोफेसर अखिलेश चौबे थे। बीती घटना से सबक लेकर एलयू प्रशासन को इस बार काफी सख्त इंतजाम करने होंगे।

अगर उसे जरा भी ढ़िलाई की तो यूनिवर्सिटी का दामन दोबारा दागदार होने में वक्त नहीं लगेगा। लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इतने सख्त इंतजाम किए जाएंगे कि इस बार किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होगी।
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