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उपराष्ट्रपति के हाथों से 35 मेधावी ही पा सकेंगे पदक
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 05 Jan 2014 04:40 PM IST
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एलयू में नौ जनवरी को होने वाले दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यक्रम 90 मिनट का होने के कारण उनके हाथों से 35 मेधावी पदक पा सकेंगे।
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इनमें सभी चांसलर मेडल, चक्रवर्ती मेडल, वाइस चांसलर मेडल व चार या उससे अधिक मेडल पाने वाले स्टूडेंट शामिल होंगे। शेष 137 मेडल 10 जनवरी को मेडल वितरण समारोह में दिए जाएंगे।
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इसके लिए मुख्य अतिथि का नाम अभी तय किया जा रहा है। मशहूर वैज्ञानिक आरए माशेलकर को डीएससी की मानद उपाधि दी जाएगी। यह जानकारी एलयू के कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने दी।
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उन्होंने बताया कि मुख्य कार्यक्रम दोपहर बाद तीन से शुरू होकर 4:30 बजे खत्म होगा। पत्रकारों को जानकारी देते हुए एलयू प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि दीक्षांत सप्ताह शुक्रवार से शुुरू हो गया है।
इस दौरान पांच लेक्चर होंगे। साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम, भातखंडे संगीत सम विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय कथक संस्थान के स्टूडेंट भी अपनी प्रस्तुति देंगे।
कई दशक पहले शुरू हुई व्यवस्था के तहत अब भी लखनऊ यूनिवर्सिटी में रिसर्च प्राइज जीतने वाले स्टूडेंट्स को 30-35 रुपये दिए जाते थे लेकिन अब उन्हें 1000 रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए जाएंगे।
कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने बताया कि इन प्राइज की संख्या नौ है। इसमें बीए द्वितीय वर्ष में हिंदी में सर्वश्रेष्ठ अंक पाने के लिए इंदरानी देवी मेमोरियल कैश प्राइज, एमए एआईएच के सर्वश्रेष्ठ स्टूडेंट के लिए सच्चिदानंद भट्टाचार्य बुक प्राइज, डॉ. वीएस मेमोरियल पार्लियामेंट्री प्राइज सहित अन्य प्राइज शामिल हैं।
आर्ट्स कॉलेज के स्टूडेंट्स के हाथ का बना हुआ स्मृति चिन्ह् उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को दिया जाएगा। यह प्रस्ताव खुद आर्ट्स कॉलेज के स्टूडेंट्स ने कुलपति के सामने रखा, जिसे उन्होंने मंजूरी दे दी।
एलयू में अब हर साल दीक्षांत समारोह होगा। इसे शैक्षिक कैलेंडर में शामिल किया जाएगा। कुलपति डॉ. एसबी निमसे ने बताया कि राजभवन की ओर से दीक्षांत समारोह की तारीख तय करने के जो निर्देश दिए गए हैं।
उसका पूरी तरह पालन होगा। हर साल एलयू का दीक्षांत समारोह दिसंबर के दूसरे व तीसरे हफ्ते में होगा।
इस बार भी प्रयास किया गया कि वर्ष 2013 का दीक्षांत समारोह दिसंबर 2013 तक हो जाए लेकिन मुख्य अतिथि का समय मिलने व अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने में समय लगा।