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बिना एनरोलमेंट ही लखनऊ विश्विद्यालय ने करवा दी पढ़ाई

Mon, 03 Feb 2014 10:28 AM IST
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 03 Feb 2014 10:28 AM IST
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lu give degree without enrollement

लखनऊ विश्वविद्यालय में बीते वर्षों में सैकड़ों स्टूडेंट बिना एनरोल हुए ही पढ़ाई पूरी करके निकल गए। इन छात्रों को यूनिवर्सिटी ने डिग्री भी दे दी।

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मामला तब फंसा जब यूनिवर्सिटी से पास आउट ये स्टूडेंट दूसरे संस्थानों में दाखिला लेने पहुंचे या नौकरी लगने पर उनका सत्यापन हुआ। छात्रों ने मार्कशीट देखी तो उसमें एनरोलमेंट नंबर का कॉलम खाली था।
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ऐसे में स्टूडेंट के होश उड़ गए। छात्रों ने जब लविवि प्रशासन से पूछताछ शुरू की तब लविवि ने 750 रुपये फाइन लेकर एनरोलमेंट नंबर बांटना शुरू किया, जबकि इसकी पूरी जिम्मेदारी लविवि की है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय की लापरवाही सैकड़ों छात्रों पर भारी पड़ी। बिना एनरोलमेंट नंबर दिए लविवि ने छात्रों को डिग्री भी बांट दी। इससे छात्रों का कॅरिअर दांव पर लग गया।

यही नहीं इस एलयू में पढ़ रहे बीए ऑनर्स द्वितीय वर्ष और तृतीय वर्ष के स्टूडेंट्स के पास भी एनरोलमेंट नंबर नहीं है। बीए ऑनर्स के छात्र पवन मौर्या, कमलेश और आकाश ने बताया कि दाखिले के समय एनरोलमेंट की फीस जमा की थी।

लेकिन अब तक एनरोलमेंट नंबर नहीं मिला। जय नारायण पीजी कॉलेज (केकेसी) में बीपीएड की पढ़ाई कर चुके छात्र राहुल, अजय व संजय ने बताया कि उनकी मार्कशीट पर एनरोलमेंट नंबर नहीं था।

जब वह दूसरे राज्य में एमपीएड करने गए तो उनसे एनरोलमेंट नंबर मांगा गया। इसके बाद दौड़े-दौड़े कॉलेज आए और यहां से प्रार्थना पत्र लिखवाकर यूनिवर्सिटी गए। इसके बाद एनरोलमेंट नंबर जारी किया गया।

यह तो ताजा मामला है। एलयू में वर्ष 1992 से लेकर 2006 तक बड़ी संख्या में ऐसे स्टूडेंट हैं जिन्हें एनरोलमेंट नंबर नहीं दिया गया। इसमें ग्रेजुएशन के साथ ही पीजी के भी बड़ी संख्या छात्र है।

अब यूनिवर्सिटी प्रशासन छात्रों से फीस लेकर उन्हें एनरोलमेंट नंबर जारी कर रही है। इसके पीछे यूनिवर्सिटी प्रशासन कोई ठोस कारण नहीं बता रही। मगर पुराने मामले अधिकतर वे हैं जिसमें यूनिवर्सिटी के पास साल भर में हुए दाखिलों का कोई आंकड़ा नहीं है।

सूत्रों के अनुसार जब परीक्षा में छात्र बैठते थे तभी स्टूडेंट्स की संख्या पता होती थी। क्योंकि ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया न होने के कारण दाखिले बड़ी संख्या में फर्जी करवाए जाते थे।

ऐसे में उन छात्रों को एनरोलमेंट नंबर जारी किए बिना ही मार्कशीट जारी कर दी गई। एलयू में वर्ष 1992 से लेकर 2006 तक बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स के एनरोलमेंट नंबर नहीं जारी किए गए हैं।

सूत्र के अनुसार एलयू में उन दिनों जो दाखिले हुए उनमें घालमेल हुआ था। ऐसे में परीक्षा विभाग ने कुछ गड़बड़ छात्रों के चक्कर में किसी के भी एनरोलमेंट नंबर जारी नहीं किए। इसका खामियाजा सभी छात्रों को भुगतना पड़ा।


यह गलती स्नातक कक्षाओं और परास्नातक दोनों कक्षाओं में हुई। एलयू प्रशासन भी यह मामला दबाए रहा। अब जब दूसरे राज्यों में एडमिशन लेने पहुंचे छात्रों से इसके बारे में पूछताछ हुई तो मामले का खुलासा हुआ।

एलयू में दाखिला करवाने को लेकर नब्बे के दशक में एक गिरोह सक्रिय था। जिसे पकड़ा भी गया था। तब यहां कैशियर कार्यालय से फर्जी रसीदें बनाकर छात्रों का एडमिशन कराया जाता था।

इस मामले में तब छात्र नेताओं की कैशियर कार्यालय के एक बाबू से लड़ाई भी हुई थी। मगर विवि प्रशासन ने इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की।

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