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अगर आप रट्टू तोते हैं तो जरूर पढ़ लें ये खबर

Mon, 15 Dec 2014 11:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 15 Dec 2014 11:32 AM IST
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LU exam pattern will be totally change now.

अब प्रतिभा का मूल्यांकन परीक्षा में लिखित जवाबों के आधार पर नहीं, बल्कि स्टूडेंट की रचनात्मकता, नजरिया व विषय से संबंधित व्यावहारिक ज्ञान से होगा। इसके लिए एलयू व डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई का नया पैटर्न लागू किया जाएगा, जिसके लिए प्रोफेसर एनके पांडेय की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है।

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जल्द ही कमेटी पैटर्न तैयार करना शुरू कर देगी। मूल्यांकन के लिए टीचर्स को भी प्रशिक्षित करना होगा, जिसके लिए वर्कशॉप में टीचर्स को ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को इंटरडिस्प्रिलनरी रूप से लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
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इसके तहत स्टूडेंट अपने कोर्स के साथ-साथ दूसरे कोर्स के पेपर भी पढ़ सकेंगे। स्टूडेंट्स के ऑप्शनल पेपर कई डिपार्टमेंट के टीचर आपस में मिलकर बनाएं, इसकी व्यवस्था की जाएगी। लखनऊ विवि में एग्जामिनेशन रिफॉर्म कमेटी के अध्यक्ष प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि स्नातक व परास्नातक में पढ़ाई व परीक्षा का पैटर्न पूरी तरह बदला जाएगा।
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इसलिए बदला गया पैटर्न

LU exam pattern will be totally change now.

अभी तक एक सेट पैटर्न पर परीक्षाएं होती हैं लेकिन देखा जाता है कि रटकर सवालों के जवाब तो दे दिए जाते हैं लेकिन जो विषय स्टूडेंट पढ़ रहा है, उसका व्यावहारिक ज्ञान उसे नहीं होता है। इसलिए पढ़ाई का पैटर्न इस तरह बदला जाएगा कि स्टूडेंट्स में रचनात्मकता बढ़े व उसके हुनर की परीक्षा हो।

प्रो. पांडेय ने बताया कि सतत व रचनात्मक मूल्यांकन की पुख्ता व्यवस्था की जाएगी। अगले सत्र में स्नातक में भी सेमेस्टर सिस्टम शुरू हो जाएगा। परास्नातक में पहले से ही सेमेस्टर सिस्टम है, इसमे इंटरनल असेसमेंट सिस्टम को अपडेट किया जाएगा। ऐसी गाइडलाइन तैयार करेंगे, जिन्हें एलयू व डिग्री कॉलेज दोनों अपने यहां लागू कर सकेंगे। इंटर-डिस्प्रिलनरी चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने पर विचार किया जा रहा है।

इसमें स्टूडेंट्स अपने डिपार्टमेंट के पेपर के साथ-साथ दूसरे डिपार्टमेंट में चल रहे कोर्स के पेपर भी पढ़ सकेंगे। इसमें कोर कोर्स के पेपर छोड़कर ऑप्शनल पेपर को इंटर-डिपार्टमेंटल लेवल पर तैयार किया जाएगा।

स्टूडेंट फ्रेंडली होगा रिफॉर्म

LU exam pattern will be totally change now.

यानी, अगर फिजिक्स का कोई स्टूडेंट सोशियोलॉजी का कोई पेपर पढ़ना चाहता है तो उस पेपर को डिजाइन करने में दोनों डिपार्टमेंट के टीचर योगदान देंगे। नंबरों का विभाजन इस तरह किया जाएगा कि स्टूडेंट्स को प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल, ओरल टेस्ट के साथ ही सेमेस्टर एग्जाम के अलग-अलग नंबर हों, उपस्थिति भी अनिवार्य होगी।

प्रो. एनके पांडेय कहते हैं कि स्टूडेंट फ्रेंडली रिफॉर्म करेंगे। एग्जामिनेशन रिफॉर्म कमेटी अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद इसकी जानकारी टीचर्स को देने के लिए वर्कशॉप व सेमिनार करेगी, ताकि टीचर इस बदलाव के बारे में पूरी तरह तैयार हो जाएं। अगर कोई अपडेट होगा तो उसे भी लागू किया जाएगा।

एलयू में एग्जामिनेशन रिफॉर्म कमेटी के अध्यक्ष प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि रिफॉर्म के बारे में स्टूडेंट्स की राय लेने के लिए फीडबैक  सिस्टम भी रखेंगे। उन्हें एक सर्वे पेपर दिया जाएगा, जिसमें वे इस नए सिस्टम के बारे में अपनी राय देंगे। अगर वह कुछ बदलाव चाहते हैं तो उसे भी लिख सकेंगे। विशेषज्ञों की राय लेने के बाद अगर लगेगा कि सुझाव आगे लागू किया जा सकता है तो उसे एक्शन लिया जाएगा।

एग्जाम के लिए होगा बड़ा क्वेश्चन बैंक

LU exam pattern will be totally change now.

इस बात का विशेष ख्याल रखा जाएगा कि स्टूडेंट पिछले सालों के पेपर के आधार पर तैयारी करके परीक्षा न पास कर पाएं। इसके लिए बड़ा क्वेश्चन बैंक विशेषज्ञों से तैयार करवाएंगे। सवाल भी ऐसे पूछे जाएंगे कि जिससे स्टूडेंट्स की कल्पनाशक्ति व रचनात्मकता का आंकलन किया जा सके। परीक्षा में कोर्स पर आधारित एक सेट पैटर्न पर कुछ सवाल रटकर आगे शायद ही कोई एग्जाम पास कर पाए।

एग्जामिनेशन व सिलेबस का सीधा संबंध होता है। हमें समय के अनुसार कोर्स को अपडेट करते रहना चाहिए। इसके लिए भी बोर्ड ऑफ स्टडीज व एकेडमिक काउंसिल को सुझाव देंगे। कोर्स में टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग को शामिल करना होगा।

इसके लिए सिलेबस ओपन कर वार्षिक प्रणाली के अनुसार जो नई व जरूरी चीजें हैं, उन्हें शामिल करना होगा। टीचर्स को भी ऐसी ट्रेनिंग दी जाएगी कि वे टेक्नोलॉजी का अधिक से अधिक प्रयोग कर सकेंगे।

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