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बिना मान्यता लिए जा रहे एमपीएड के आवेदन

Thu, 03 Jul 2014 04:26 AM IST
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ
शैलेश अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 03 Jul 2014 04:26 AM IST
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LU does have recognition for MPed course

लखनऊ विश्वविद्यालय में एमपीएड की मान्यता के बिना ही इस कोर्स में आवेदन लिए जा रहे हैं।

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दरअसल, नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (एनसीटीई) की नॉर्दन रीजनल कमेटी (एनआरसी) ने विवि से 23 जनवरी, 2013 को ही इस कोर्स की मान्यता छीन ली थी।

लविवि ने एनसीटीई में अपील की, जिस पर एनआरसी को निर्देश दिए गए कि विवि को शो कॉज नोटिस जारी कर जवाब लें और आगे की प्रक्रिया हो, तभी से यह मामला रुका हुआ है।

वजह चाहे जो भी लेकर इसका खामियाजा स्टूडेंट्स को भुगतना पड़ सकता है। इस कोर्स की 30 सीटों पर प्रवेश लिए जा रहे हैं।

विश्वविद्यालय से बीपीएड और एमपीएड की मान्यता खत्म करने का मामला इलाहाबाद हाईकोट में दाखिल एक जनहित याचिका से शुरू हुआ।

इस मामले में हाईकोर्ट ने नौ नवंबर, 2011 को एनसीटीई को यह निर्देश दिए कि वे इस बात की जांच करें कि विवि में इस कोर्स के मानक पूरे हैं या नहीं।

16 मार्च, 2012 को नॉर्दन रीजनल कमेटी की बैठक में लविवि को शो कॉज नोटिस जारी किया गया।

इसके जवाब में विवि को कोर्स की नियुक्त शिक्षकों की संख्या व योग्यता की सूचना देनी थी लेकिन विवि ने नहीं दी।

मामले को गंभीरता से लेते हुए एनआरसी ने 23 जनवरी, 2013 को पत्र जारी कर बीपीएड व एमपीएड के संचालन की अनुमति छीन ली।

साथ ही विश्वविद्यालय को यह मौका दिया गया कि यदि वह एनसीटीई के ऑर्डर से संतुष्ट नहीं हैं तो दो महीने के अंदर इसके लिए अपील कर सकता है।

वहीं, विवि के प्रति कुलपति प्रो. एके सेन गुप्ता का कहना है कि उन्हें शो कॉज नोटिस मिला ही नहीं।

इस बात से एनसीटीई को भी अवगत कराया गया और नोटिस भेजने का निवेदन भी किया, ताकि वे जवाब दे सकें। एनसीटीई ने माना कि विवि को मान्यता रद्द होने से पहले नोटिस नहीं मिला।
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इस पर एनसीटीई ने 13 जनवरी, 2014 को एनआरसी को निर्देश दिए कि अपील ऑर्डर जारी होने के 15 दिन के अंदर फिर से लविवि को शो कॉज नोटिस जारी कर 30 दिन के अंदर विश्वविद्यालय से जवाब प्राप्त करें।
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19 जनवरी, 2014 को लविवि में फिजिकल एजुकेशन के विभागाध्यक्ष प्रो. मनोज दीक्षित ने नोटिस भेजने की मांग की लेकिन एनआरसी ने नोटिस जारी नहीं किया।

विवि ने जयपुर स्थित एनआरसी के कार्यालय जाकर भी बात की, लेकिन फिर भी अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यही कारण है कि अभी तक लिखित रूप में विश्वविद्यालय को एनसीटीई से बीपीएड और एमपीएड कोर्स के संचालन की अनुमति नहीं मिल पाई है।

हालांकि प्रवेश का समय आने की वजह से अब विश्वविद्यालय ने बिना मान्यता के ही एमपीएड के आवेदन लेना शुरू कर दिया है।

इस मामले पर एनआरसी के रीजनल डायरेक्टर डॉ. इदु खान मंसूरी कहा कहना है कि यह मामला मेरे पद ग्रहण करने से पहले का है। प्रो. मनोज दीक्षित ने कुछ दिन पहले मुझसे मिलकर मामले से अवगत कराया था।

फिलहाल, उस केस की सही स्थिति की जानकारी नहीं है। उसकी फाइल देखने के बाद कुछ बता पाउंगा। यदि मामला बिना वजह रुका हुआ है तो जल्द ही इसका निस्तारण होगा।

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