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'नियम नहीं, संरक्षण के लिए नेचर से प्यार जरूरी'

Mon, 20 Jan 2014 09:45 AM IST
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 20 Jan 2014 09:45 AM IST
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love for nature

नियमों को कड़ा कर लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता नहीं बढ़ाई जा सकती। जनता को अपने विचार बदलने होंगे, उन्हें अपने नेचर से प्यार करना सीखना होगा।

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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में ये विचार जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एमएम कुमार ने व्यक्त किए।

रविवार को विश्वविद्यालय के लॉ डिपार्टमेंट की ओर से पर्यावरण प्रदूषण पर गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें विद्वानों ने अपने विचार व्यक्त किए।

न्यायमूर्ति एमएम कुमार ने न्यायिक सक्रियता के पर्यावरणीय सुरक्षा पहलू पर कहा कि आज भारतीय दर्शन की ओर उन्मुखता जरूरी है, जो वसुधैव कुटंबकम और सर्वे भवंतु सुखिन: पर आधारित है।
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उनके अनुसार पर्यावरण को संरक्षित करके ही सभी सुखी रह सकते हैं। उद्घाटन भाषण में प्रो. वीरेंद्र कुमार ने पर्यावरणीय प्रदूषण को गंभीर सामाजिक समस्या बताया।
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साथ ही उन्होंने आम जीवन में पर्यावरण के योगदान पर चर्चा की। बीबीएयू के कुलपति प्रो. आरसी सोवती ने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है।

गो सेवा इसी का उदाहरण है। कार्यक्रम में धन्यवाद भाषण डॉ. प्रीति मिश्रा ने दिया। गोष्ठी का समापन सोमवार को किया जाएगा। समारोह का संयोजन डॉ. सूरा दारापूरी ने किया।


सोशल अपलिफ्टमेंट थ्रू रिसर्च एंड एक्शन (सूत्र), आनंद सेवा समिति और पाथवेज संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आनंद पब्लिक स्कूल में दो दिवसीय पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इसमें विकास की अंधी दौड़ और मनुष्यों के कृत्यों की वजह से पर्यावरण को हो रहे नुकसान और उसकी रोकथाम पर चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रमोद चंद्र, डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह, आनंद मिश्र, दीप्ति मिश्र आदि उपस्थित रहे।

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