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इन दिनों 'नेताजी' यहां हैं बिजी

Wed, 28 Aug 2013 09:20 AM IST
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून
अमर उजाला, आफताब अजमत, देहरादून Updated Wed, 28 Aug 2013 09:20 AM IST
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leaders busy in convincing

मतदाताओं के लिहाज से प्रदेश के देहरादून के डीएवी कॉलेज के छात्र नेताओं के लिए चुनाव प्रचार भी महाप्रचार की माफिक है।

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एक-एक वोट की खातिर वह सुबह छह बजे से रात के 12 बजे तक दर-दर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। हमने कुछ ऐसे ही प्रत्याशियों का दिनभर का शिड्यूल जाना।

ब्रेक फास्ट पर ब्रेक
मैं आजकल सुबह साढ़े पांच बजे उठ जाता हूं। सबसे पहले शहर के कोचिंग संस्थानों का रुख करता हूं। आसपास रूम के लड़कों से मिलने के बाद नौ बजे कॉलेज पहुंच जाता हूं। ब्रेक फास्ट नहीं हो पा रहा है।
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कॉलेज में करीब डेढ़ बजे तक चुनाव प्रचार के बाद दो बजे प्रचार के लिए बाहरी क्षेत्रों में निकल जाते हैं। लंच कभी कर लिया नहीं तो जूस पीकर या हल्का खाना खाकर काम चला लेते हैं। पांच बजे के बाद डोर टू डोर प्रचार। शाम को आठ बजे के बाद हॉस्टलों पर जाना।
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फिर किसी छात्र को खाने के लिए बोल दिया जाता है फिर रात को 11 बजे दोबारा नए दिन की कार्ययोजना में जुट जाता हूं।
- सिद्धार्थ, अध्यक्ष पद प्रत्याशी, एबीवीपी

केवल एक बार खाना
सुबह पांच बजे उठता हूं। सुबह से ही करनपुर के आसपास के क्षेत्रों में लड़कों से मिलते हैं। दस बजे कॉलेज पहुंच जाते हैं। यहां से निकलकर दोपहर दो बजे कांग्रेस भवन पहुंचकर चुनाव प्रचार को टीमें बनाई जाती हैं।

व्यस्तता इस कदर है कि सुबह का नाश्ता और दोपहर का भोजन नहीं हो पा रहा है। रात को साढ़े आठ बजे तक मीटिंग का दौर चलता है। नौ बजे तक चुनाव प्रचार से वापस आने के बाद दोबारा अगले दिन की रणनीति तैयार की जाती है। 11 बजे तक जाकर फ्री हो जाते हैं। पूरे दिन में एक ही बार खाना खा पाते हैं।
- भूपेंद्र नेगी अध्यक्ष पद प्रत्याशी, एनएसयूआई

जहां देरी हुई, वहीं रात काट ली
मैं आजकल रोज सुबह छह बजे उठ जाता हूं। आठ बजे तक काफी कार्यकर्ता रूम पर आ जाते हैं। 8:30 बजे तक हम कॉलेज के लिए निकल जाते हैं।

कॉलेज में से अपने कार्यकर्ताओं के साथ नौ बजे के करीब किसी रेस्टोरेंट में आलू परांठा खाने के लिए चले जाते हैं। इसके बाद डीएवी जाते हैं, जुलूस निकालकर प्रचार करते हैं। यहीं दो बज जाते हैं। दोपहर को दाल चावल खाकर किसी क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए निकल जाते हैं।

चुनाव प्रचार के लिए अगर किसी क्षेत्र में रात हो जाती है तो उसी क्षेत्र में रुक जाते हैं। रात को ग्रामीणों का बनाया हुआ खाना ही खाते हैं। फिर सुबह की शुरुआत उसी गांव से होती है और दोबारा दोपहर तक ही कॉलेज पहुंचते हैं।
- जोगेंद्र सिंह, महासचिव पद प्रत्याशी, आर्यन

हाईटेक जिम्मेदारी
सुबह छह बजे उठकर बिना नहाए घर से निकलकर सबसे पहले वरिष्ठों से मिलकर उन्हें अपने हक में जुटाते हैं। साढ़े आठ बजे वापस घर आकर नौ बजे कॉलेज में आ जाते हैं। डेढ़ बजे के करीब बाहर चुनाव प्रचार के लिए अपने कार्यकर्ताओं के साथ निकल जाता हूं।

कभी डोर टू डोर कंवेंसिंग में तो कभी मीटिंग अटेंड करने में। डोर टू डोर शाम आठ बजे तक चलता है। रात को आठ से दस बजे के बीच अगले की योजना बनाते हैं। रात को दस के बाद घर तो चला जाता हूं लेकिन यहीं से शुरू होती है सबसे अहम हाईटेक जिम्मेदारी।

फेसबकु, वाट्स एप जैसे माध्यमों से सभी को अपने हक में वोट के लिए अपील और मोबाइल पर एसएमएस भेजने के बाद सोता हूं।
- युद्धवीर सिंह नेगी, महासचिव पद प्रत्याशी, सत्यम ग्रुप

वोटर के पास ही सो जाता हूं
मैं रोज सुबह छह बजे उठकर सबसे पहले पूजा करता हूं। इसके बाद सबसे पहले कॉलेज के शिक्षकों और लड़कों से उनके रूम पर जाकर मिलता हूं। इसके बाद कॉलेज जाते हैं।

दिन में दो बजे कुछ देर लंच के लिए वक्त निकालता हूं। लंच से फ्री होने के बाद यहीं आगे की रणनीति तय करते हैं। बाकी का वक्त डोर टू डोर और मीटिंग में चुनाव प्रचार में कटता है। शाम को आठ बजे के बाद लड़कों के हॉस्टलों में घूमकर चुनाव प्रचार किया जाता है।


अगर कहीं देर रात हो जाती है तो हॉस्टल में ही लड़कों के कमरे में सो जाता हूं। सुबह जल्दी उठकर घर आकर फ्रेश होता हूं।
- गोविंद सिंह, प्रत्याशी महासचिव पद, पट्टू ग्रुप

लड़की का दम भी कम नहीं
डीएवी कॉलेज में अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने जा रही स्वाती नेगी का शिड्यूल भी लड़कों से कम नहीं है। स्वाती ने बताया कि वह सुबह सात बजे उठ जाती हैं। इसके बाद आठ बजे तक घर से निकलकर सबसे पहले कुछ वरिष्ठों से मुलाकात करती हैं।

नौ बजे कॉलेज पहुंच जाती हैं। कॉलेज में ही दो बजे तक चुनाव प्रचार के दौरान प्रचार टीमों का गठन किया जाता है। यहीं से शुरुआत होती है विभिन्न क्षेत्रों में मीटिंग, डोर टू डोर कंवेंसिंग की। इस काम में आजकल रात के 12 बज जाते हैं।

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