लॉ स्टूडेंट्स 30 तक करें इंटर्नशिप के लिए आवेदन
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उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी इंटर्नशिप योजना के लिए विभिन्न विश्वविद्यालयों के विधि छात्रों से आवेदन मांगे हैं।
आयोग की वेबसाइट तैयार नहीं हो पाने के चलते विश्वविद्यालयों को स्पीड पोस्ट से आवेदन फॉर्म भेजे गए हैं। इसके अलावा स्टूडेंट्स आयोग की ई मेल आईडी पर भी आवेदन भेज सकते हैं। इसके लिए अंतिम तिथि 30 मई है।
आयोग का प्रयास है कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 या 18 जून से इंटर्नशिप शुरू करा दी जाए। वैसे तो आयोग ने इंटर्नशिप की यह योजना लॉ और सोशल वर्क दोनों ही कोर्स के छात्रों के लिए बनाई है लेकिन पहले बैच के लिए केवल लॉ छात्र ही आवेदन कर सकते हैं।
पहला बैच पूरा होने के बाद सोशल वर्क वालों को भी शामिल किया जाएगा। इंटर्नशिप के लिए तीन वर्षीय एलएलबी में अंतिम वर्ष और पांच वर्षीय एलएलबी में तीसरे, चौथे और पांचवें वर्ष के छात्र आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन केलिए छात्र-छात्राएं आयोग की वेबसाइट upbalaayog@gmail.com या 0522-2308538 पर सुबह 11 से शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
आवेदन के बाद इंटरव्यू से होगा चयन
आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह ने बताया कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद छात्र-छात्राओं के इंटरव्यू होंगे। इसके लिए उन्हें आयोग के लखनऊ स्थित कार्यालय आना होगा।
अंतिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों के लिए दो दिन का इंडक्शन प्रोग्राम होगा।
जूही सिंह के विशेष कार्याधिकारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि अभी तकलखनऊ से डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ यूनिवर्सिटी, अंबेडकर यूनिवर्सिटी, बीएचयू, अलीगढ़ मुस्लिम व इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, एमिटी के लखनऊ और नोएडा कैम्पस, बरेली की इनवर्टिस और नोएडा की शारदा व गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने सकारात्मक जवाब दिया है। कुछ अन्य यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से संपर्क किया जा रहा है।
100 छात्रों का होगा बैच
जूही सिंह ने बताया कि जिन यूनिवर्सिटी या कॉलेज में आवेदन फॉर्म नहीं पहुंचे हैं और वहां के स्टूडेंट्स इंटर्नशिप करना चाहते हैं तो सीधे आयोग से संपर्क कर सकते हैं। उनका आवेदन आने के बाद संबंधित शिक्षण संस्थान को भेजा जाएगा। वहां से सहमति मिलते ही छात्र-छात्रा को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा।
संस्थान खुद भी आयोग को ई मेल या फोन पर संपर्क कर इंटर्नशिप योजना के लिए अपने छात्रों के नाम सुझा सकते हैं। एक बैच में 100 स्टूडेंट्स होंगे।
इस दौरान वे स्वास्थ्य, शिक्षा, बच्चों के साथ होने वाले और उनके द्वारा किए जाने वाले अपराधों के अलावा जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ रहकर काम करेंगे।
इस पर उप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष जूही सिंह का कहना है कि आयोग की वेबसाइट भी तैयार होने को है लेकिन इस वजह से छात्र-छात्राओं को इंतजार न करना पड़े इसलिए हम खुद विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को पत्र और आवेदन फॉर्म भेज रहे हैं। स्टूडेंट्स और शिक्षण संस्थान आयोग की ई मेल आईडी और फोन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।