मोदी जी! बीए पास कर ली, आगे कहां पढ़ने जाएं?
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हर साल दो हजार युवा ग्रेजुएट होकर निकलते हैं, लेकिन आगे की पढ़ाई करने के लिए कहां जाएं? ये उनके लिए मुसीबत है। इसका कारण है जिले में मौजूद 7 सरकारी कॉलेजों में पीजी कोर्स न होना। मजबूरन युवाओं को पीजी कोर्सेज के लिए घर से दूर दूसरे जिले में जाना पड़ता है।
हम बात कर रहे हैं हरियाणा के रेवाड़ी जिले की। यहां सात राजकीय कॉलेज हैं, लेकिन किसी में भी पीजी कोर्सेस संचालित नहीं है। रेवाड़ी में एकमात्र कंवाली कॉलेज में केवल अंग्रेजी संकाय है, लेकिन वहां नाम मात्र के ही विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी यूनिवर्सिटी में भी साइंस और राजनीति विज्ञान संकाय नहीं हैं।
ऐसे में विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए या तो रोहतक अथवा समीपवर्ती राज्य राजस्थान के शहरों में जाना पड़ता है। एक तरफ जहां प्रदेश में शिक्षा का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले में उच्च स्तरीय शिक्षा की कमी विद्यार्थियों पर भारी पड़ रही है। इस समय रेवाड़ी जिले में सात राजकीय कॉलेज संचालित हैं, जिनमें कंवाली व बावल कॉलेज को छोड़ दें तो किसी भी कॉलेज में पीजी कक्षाएं नहीं चल रही हैं।
ये 7 राजकीय कॉलेज हैं जिले में
- राजकीय कॉलेज खरकड़ा
कॉलेज में अंडर ग्रेजुएट स्तर पर कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय हैं। पीजी कोर्स कोई संचालित नहीं है। जबकि यहां से प्रतिवर्ष लगभग 450 विद्यार्थी पास आउट होकर निकलते हैं।
- राजकीय कॉलेज बावल
कॉलेज में कॉमर्स, साइंस और कला संकाय चल रही हैं। पोस्ट ग्रेजुएट स्तर पर केवल संस्कृत विषय है, जिसमें विद्यार्थियों की रुचि ज्यादा नहीं है। इसमें 30 सीटें हैं, जिनमें लगभग 25 फुल हैं।
- राजकीय कॉलेज कंवाली
इस कॉलेज में आर्ट, कॉमर्स, साइंस और बीसीए कोर्स चल रहे हैं और पीजी कोर्स में केवल अंग्रेजी है, उसमें विद्यार्थियों की संख्या भी बहुत कम हैं। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्र में अंग्रेजी संकाय के प्रति विद्यार्थियों में अधिक रुचि नहीं होना है। इस कॉलेज से भी हर साल तीनों संकायों से करीब 300 विद्यार्थी पास आउट होकर निकलते हैं।
- राजकीय कॉलेज गुरावड़ा
कॉलेज में पीजी कोर्स का अभाव है। केवल अंडर ग्रेजुएट कोर्स में आर्ट, वाणिज्य और नॉन मेडिकल संकाय ही हैं। इस कॉलेज से करीब 150 विद्यार्थी ग्रेजुएट निकल रहे हैं।
- राजकीय कॉलेज नाहड़
कॉलेज से लगभग प्रतिवर्ष 300 विद्यार्थी पास आउट होकर निकलते हैं, लेकिन पीजी कोर्स के अभाव में उन्हें इधर-उधर भटकना पड़ता है। कुछ साल पहले कॉलेज में पीजी कोर्स में अंग्रेजी संकाय था, लेकिन फिलहाल नहीं है।
- राजकीय महिला कॉलेज रेवाड़ी
सेक्टर-18 स्थित महिला कॉलेज में भी पीजी कोर्सों का अभाव हैं। यहां भी केवल ग्रेजुएट स्तर पर ही कोर्स चल रहे हैं। जबकि यहां से लगभग प्रतिवर्ष 700 से ज्यादा छात्राएं ग्रेजुएट होकर निकलती हैं। पाली महिला कॉलेज में इस सत्र से ही कक्षाएं लगी है।
पीजी कोर्स के लिए कहां जाए विद्यार्थी?
प्रतिवर्ष ग्रेजुएट होकर निकलने वाले छात्र-छात्राएं पोस्ट ग्रेजुएट करने के लिए आखिर कहां जाएं। यह एक सबसे बड़ा सवाल है। निजी कॉलेजों में शिक्षा ग्रहण करें तो वहां फीस ज्यादा लगती है। सरकारी कॉलेजों में कोर्स नहीं है। कंवाली कॉलेज में इंगलिस है तो इसके प्रति विद्यार्थियों में इतनी रुचि नहीं है।
आईजीयू मीरपुर में भी साइंस संकाय और पॉलिटिकल साइंस कोर्स का अभाव है। जबकि पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएट भी ज्यादा मिलते हैं। आईएएस और अन्य सिविल सेवाओं में ऐच्छिक विषय के तौर पर भी ज्यादातर विद्यार्थी पॉलिटिकल साइंस ही चुनते हैं।
संगठन उठा चुके हैं मुद्दा
दक्षिण हरियाणा विकास लोक मंच के अध्यक्ष बाबू जगजीत सिंह और प्रो. रणबीर सिंह यादव सहित शिक्षाविदों ने क्षेत्र की तरक्की के लिए सरकारी कॉलेजों में पीजी कोर्सेज के संचालन की आवाज उठा चुके हैं, ताकि इस क्षेत्र के युवाओं को पीजी की पढ़ाई के लिए दूरस्थ स्थानों पर न जाना पड़े। निजी कॉलेजों में शिक्षा की महंगी मार से भी बच सके। इसके अलावा मीरपुर आईजीयू में भी साइंस संकाय और पॉलिटिकल साइंस विषय शुरू करने की मांग की हैं।