आभावों से निखरा मजदूर का बेटा और बन गया टॉपर
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मन में आगे बढ़ने की ठान ली हो तो हालात भी कदम नहीं रोक सकते। नर्सिंग की प्रवेश परीक्षा में टॉप करने वाले युवाओं की कहानी भी यही बयां करती है।
एक युवा के पिता मजदूरी करके घर का खर्च चलाते हैं तो एक युवक ट्यूशन पढ़ाकर खुद घर का खर्च चलाते हैं। बावजूद इसके पढ़ाई में कसर नहीं छोड़ी और आज मुकाम हासिल किया।
कुछ ऐसे ही अभावों से भरपूर कहानी है उत्तराखंड में लंढौरा के जौरासी गांव निवासी मोहम्मद शहजाद की। उनके पिता निसार अहमद मजदूरी करते हैं। आठ भाई-बहन के परिवार में मजदूरी से घर चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण है। बहादराबाद राजकीय इंटर कालेज से 12वीं करने के बाद शहजाद आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहता था।
लिहाजा, उन्होंने बीएएमएस, बीफार्मा और बीएससी नर्सिंग की प्रवेश परीक्षा दी। बीएससी नर्सिंग में उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर पूरे राज्य में टॉप कर लिया। शहजाद को हालांकि इस बात का यकीन नहीं था। अब वह नर्सिंग कोर्स करने के बाद परिवार का सहारा बनना चाहते हैं।
घर का खर्च चलाना था चुनौती
पित्थुवाला निवासी ओम प्रकाश पंत के लिए जीएनएम टॉपर बनने का सफर पहाड़ की चढ़ाई की तरह रहा। पिता गोवर्धन प्रसाद ने वर्ष 1993 में किसी समस्या के चलते प्राइवेट नौकरी छोड़ दी। तब से घर खाली बैठे हैं।
घर का खर्च चलाना ओमप्रकाश के लिए सबसे बड़ी चुनौती था। इसके बावजूद उन्होंने हौसला नहीं हारा। 10वीं पास करने के बाद ही ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया। ओमप्रकाश इन दिनों 10वीं और 12वीं के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते हैं।
उन्होंने बताया कि उनका सपना डॉक्टर बनकर पहाड़ की सेवा करना था लेकिन आर्थिक कमजोरी की वजह से वे एआईपीएमटी या यूपीएमटी परीक्षा में नहीं बैठ पाए। कहा कि अब वे पूरी मेहनत से जीएनएम का कोर्स करेंगे।