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दून में कहीं सपना न रह जाए नॉलेज सिटी
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 24 Jan 2014 09:55 AM IST
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उत्तराखंड सरकार ने मैक्सिको की तर्ज पर राजधानी देहरादून में नॉलेज सिटी बनाने का ऐलान कर भले ही वाहवाही लूटने की कोशिश की हो, लेकिन प्रदेश में पहले से मौजूद डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की बदहाली इस सिटी के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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आलम यह है कि न तो कॉलेजों में पढ़ाने के लिए शिक्षक हैं, न विवि में प्रोफेसर। ऐसे में अलग नॉलेज सिटी बनाने का दावा कहां तक पूरा होगा, बड़ा सवाल है।
सुविधाओं से दूर विश्वविद्यालय
यूटीयू : तकनीकी विवि संविदा के सहारे है। न कुलपति हैं, न स्थायी अफसर। कुलसचिव से लेकर नीचे के पद संविदा से भरे हैं। हालांकि 86 नए पदों का ऐलान हुआ है, मगर बात आगे नहीं बढ़ी।
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यूएयू : 2009 से उत्तराखंड आयुर्वेद विवि बेरुखी का शिकार है। कई कोशिशों के बाद संबद्धता अधिकार तो मिला, लेकिन यह आज भी कुछ कर्मचारियों के भरोसे चल रहा है।
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दून विवि : 2005 से जेएनयू की तर्ज पर शुरू हुए दून विवि में पूरा बजट न आने से निर्माण अटका है। कुल 65 पदों में 42 के लिए इस साल नोटिफिकेशन जारी की गई।
श्रीदेव सुमन विवि : श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि को संबद्धता का दर्जा और प्राइवेट परीक्षा की जिम्मेदारी मिलने के बाद कर्मचारियों की भर्ती नहीं हो पा रही है। कुलपति, कुलसचिव के अलावा सारा काम क्लर्कों के भरोसे है।
यूओयू : मुक्त विवि की स्थापना 2005 में हुई। हल्द्वानी में कक्षाएं शुरू नहीं हो सकी हैं। विवि करीब 23 स्थायी कर्मचारियों के भरोसे है। बाकी संविदा से काम चल रहा है। कैंप दफ्तर राजधानी दून में है, जहां कोई सुविधा नहीं। इसके अलावा जीबी पंत विवि, कुमाऊं विवि, उत्तराखंड यूनिवर्सिटी आफ हार्टिकल्चर एंड फारेस्ट्री के हालात भी बदतर हैं।
एक कमरे में सीबीएसई का क्षेत्रीय कार्यालय
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कई माह पहले देहरादून क्षेत्रीय कार्यालय के लिए काम शुरू कर दिया था। जमीन के लिए जिला प्रशासन को भेजे आवेदन का नतीजा अब तक शून्य है।
1263 स्कूलों की जिम्मेदारी उठाए सीबीएसई का क्षेत्रीय कार्यालय होटल द्रोण के एक कमरे में चल रहा है।
उत्तराखंड में शिक्षा का स्तर गिरा
उच्च और तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा करने के बाद मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि जल्द उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय में कुलपति का खाली पद भर लिया जाएगा। कहा कि राज्यपाल की ओर से सुझाव आया है।
चयन समिति में प्रमुख सचिव को समन्वयक बनाने पर राजभवन की आपत्ति पर उनका कहना है कि एक्ट में इसका प्रावधान है। राज्यपाल से वार्ता कर चयन प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी।
कॉलेजों को यूजीसी से ग्रांट न मिले तो शायद उच्च शिक्षा यहां भी न पहुंचती। सरकार को पहले कॉलेजों में अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी देनी चाहिए। इसके बाद ही नालेज सिटी की बात कर सकते हैं। सरकारों का संविदा व्यवस्था पर फोकस है। इससे सुधार संभव नहीं है।
- प्रो. वीए बौड़ाई, प्रिंसिपल और शिक्षा विशेषज्ञ