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58 मेडिकोज को परीक्षा देने से रोका
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 25 Jan 2014 09:59 AM IST
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किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में एमबीबीएस फाइनल प्रोफेशनल के 58 छात्रों को शुक्रवार को परीक्षा देने से रोक दिया गया। इन छात्रों को सर्जरी विभाग में अटेंडेंस कम होने के कारण रोका गया है।
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अचानक हुई इस कार्रवाई से छात्रों में रोष है। छात्रों ने केजीएमयू के फैसले पर पक्षपात का आरोप लगाया है। केजीएमयू में एमबीबीएस के फाइनल प्रोफेशनल में 180 छात्र-छात्राएं हैं। शुक्रवार को इनका मेडिसिन का पहला पेपर था।
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परीक्षा देने पहुंचे 58 छात्र-छात्राओं को शार्ट अटेंडेंस के कारण परीक्षा में शामिल न करने का फरमान सुना दिया गया। छात्रों ने परीक्षा देने से रोकने का कारण पूछा तो उन्हें बताया गया कि 75 फीसदी से कम अनुपस्थिति होने के कारण ऐसा किया गया है।
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इस पर छात्र-छात्राएं आक्रोशित हो उठे। उन्होंने कहा कि ऐसे तो लगभग 100 छात्र हैं जिनकी अटेंडेंस कम है। सिर्फ 58 पर ही कार्रवाई क्यों की गई।
मेडिकोज का कहना था कि क्लास में कई ऐसे छात्र थे जो उनसे अधिक क्लास से गायब रहे। उन्हें परीक्षा में बैठने दिया गया है। उन्होंने सभी छात्रों की उपस्थिति को सार्वजनिक करने की मांग की।
जिससे ये पता चल सके कि कौन-कौन छात्र कितने दिन गायब रहा है। वहीं छात्रों ने ये भी कहा कि जिन 58 छात्रों को परीक्षा देने से रोका गया है उनमें से अधिक सामान्य वर्ग के हैं।
जिस विभाग में उनकी अटेंडेंस शार्ट दिखायी गई है, उनके विभागाध्यक्ष ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है। हालांकि इस दौरान छात्र-छात्राओं का पहला पेपर छूट गया।
परीक्षा देने से वंचित रह गए सभी छात्र-छात्राएं अब इस मामले में आगे की रणनीति तय करने में लगे हैं। जिससे केजीएमयू प्रशासन की कार्रवाई की जवाब दिया जा सके।
उधर केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि जिन्हें परीक्षा देने से रोका गया है, उन्हें शार्ट अटेंडेंस की जानकारी दे दी गई थी। ये भी बता दिया गया था कि सूची में शामिल छात्र परीक्षा नहीं दे पाएंगे। इसके बावजूद छात्रों का रवैया नहीं सुधरा।