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पढ़िए क्लास डिस्टर्ब करने के लिए किसने फेंके कंचे!

Fri, 19 Dec 2014 03:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 19 Dec 2014 03:55 PM IST
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kgmc rhapsody-2014.

रैपसोडी की धूम से पूरा केजीएमयू मस्ती के रंग में सराबोर है। शाम ढलते ही गुलाबी ठंड के बीच कॉफी विद जॉर्जियन का स्टेज सजा तो कई राज धीरे-धीरे खुलने लगे।

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नेत्र रोग विभाग की प्रो. विनीता सिंह ने बताया कि उस समय रैगिंग का अंदाज अलग था जिसे तेरह नंबरी कहा जाता था। इस बात को सुनते ही पूरे कार्यक्रम में हंसी के ठहाके लगने लगे।
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उन्होंने बताया कि इस तरह की रैगिंग में सीनियर जूनियर्स को पैसा देते थे। उस समय टीचर्स को निक नेम से पुकारा जाता था और आज भी ये दौर है, लेकिन कोई बताता नहीं है।
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क्लास को डिस्टर्ब करने के लिए सीट पर बैठे-बैठे स्टूडेंट कंचा फेंकते थे। इसके बाद पूरी क्लास में हंसी की महफिल सजती थी। लड़के-लड़कियों को प्रपोज करने के लिए फूल देते थे।

ये सिलसिला आज भी है, लेकिन प्रपोजल का अंदाज थोड़ा बदल चुका है। फेसबुक, व्हाट्सएप और टेलीग्राम से भी कपल्स एक-दूसरे को दिल का हाल सुना रहे हैं।

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