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केजीएमयू में शुरू होंगे नौकरी दिलाने वाले सर्टिफिकेट कोर्स

Sat, 16 Jan 2016 02:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 16 Jan 2016 02:06 PM IST
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job oriented certificate course will start in KGMU

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) नौ विषयों में रोजगारपरक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करेगा। शुक्रवार को एकेडमिक काउंसिल ने इसे हरी झंडी दे दी है। इसके अलावा प्लास्टिक सर्जरी विभाग हैंड एंड माइक्रोसर्जरी सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किए जाएंगे।

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कुलपति प्रो. रविकांत ने बताया कि केजीएमयू में एमबीबीएस, बीडीएस, एमएस, एमसीएच, एमडीएस कोर्स चल रहे हैं। अब सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करने के लिए तैयारी है।
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उन्होंने बताया कि एमएससी बायोकेमेस्ट्री, एमएससी रेडियोलोजिकल फिजिक्स, एमएससी क्लीनिकल साइकोलॉजी, एमएससी लैब टेक्नोलॉजी, डीएम एडोलसेंट साइकियाट्रिक, बीएससी ऑप्टोमेट्री और बीएससी फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए एकेडमिक काउंसिल ने अनुमति दे दी है।
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बीएससी ऑप्टोमेट्री और बीएससी फिजियोथेरेपी पाठ्यक्रम की प्रवेश प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। बैठक में राजकीय मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज के निदेशक, प्रधानाचार्य आदि मौजूद थे।

प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो.एके सिंह ने बताया कि एक साल का हैंड एंड माइक्रोसर्जरी सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू करेगा।

इसमें हाथ की गंभीर चोट और दुर्घटना में कटे हाथों को जोड़ने की माइक्रोसर्जरी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आर्थोपैडिक, जनरल सर्जरी व प्लास्टिक सर्जरी के चिकित्सकों के लिए एक साल का ये पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। पाठ्यक्रम में दो सीटें होंगी।

डायबिटीज पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम

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फिजियोलॉजी विभाग के प्रो. नरसिंह वर्मा ने बताया कि डायबिटीज के बढ़ते हुए मरीजों की संख्या को देखते हुए एक ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया जाएगा।

दरअसल, फिजीशियन मरीजों का इलाज तो कर रहे हैं, लेकिन नई दवाओं और आधुनिक तकनीक की जानकारी उन्हें नहीं है। क्योंकि प्राइवेट प्रैक्टिश्नर्स के लिए खुद को अपडेट करने की कोई भी व्यवस्था नहीं होती है।

ऐसे चिकित्सकों के लिए ही एक वर्षीय ऑनलाइन कोर्स शुरू किया जा रहा है। इसमें पढ़ाई से संबंधित सभी जानकारी के साथ पंजीकरण और परीक्षा भी ऑन लाइन ही होगी। इसके बाद उत्तीर्ण चिकित्सकों को सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।

एकेडमिक काउंसिल से इसका प्रस्ताव पास हो गया है। अब इसे कार्य परिषद में रखा जाएगा। इसके बाद एसोसिएशन ऑफ डायबिटिक इंडिया के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा।

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