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सुलझ गया जेएनयू का दलित स्कॉलर विवाद
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 30 Jan 2016 12:04 AM IST
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जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में दलित शोधकर्ता और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच का विवाद सुलझ गया है। विश्वविद्यालय ने छात्र मदन मेहर के परिवार में हुई मौत और वित्तीय कठिनाइयों पर अफसोस जताते हुए विवाद सुलझाने का दावा किया है।
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छात्र ने फेलोशिप का जो पैसा अपने परिजनों के इलाज में खर्च कर दिया था, उसे वह फेलोशिप राशि से कटवा देगा। इसके अलावा छात्र की दोनों मांगें भी मान ली गई हैं। उधर, छात्र ने विवि प्रबंधन को पत्र लिखकर मदद करने के लिए धन्यवाद कहा है।
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जेएनयू प्रबंधन के मुताबिक, नॉन-नेट रिसर्च स्कॉलरशिप की समय अवधि पूरी होने और रिसर्च वर्क पूरा न करने के कारण उसकी फेलोशिप ग्रांट रुक गई थी। इसके अलावा छात्र ने पहले फेलोशिप राशि ले ली थी, लेकिन रिसर्च वर्क नहीं किया था। इस कारण तकनीकी खामी के चलते सारा मामला अटका था। पीएचडी पूरी करने के लिए समय मांगा था, जोकि औपचारिकताएं पूरी होने पर मौका दिया जाएगा। इसी के साथ फेलोशिप ग्रांट भी मिलनी शुरू हो जाएगी।
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मेदन मेहर ने पत्र लिखकर कुलपति प्रो. एम जगदीश कुमार और स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की डीन प्रो. अनुराधा चिनाय का मदद करने के लिए धन्यवाद किया है। छात्र ने अपने पत्र में परिवार में हुई मौत और वित्तीय कठिनाइयों का हवाला भी दिया है। छात्र ने लिखा है कि फेलोशिप ग्रांट में से पूर्व में ली गई धनराशि को काट लिया जाए।
बता दें कि स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के दलित छात्र ने कुलपति को पत्र लिखकर पीएचडी में एक साल न बढ़ाने और फेलोशिप ग्रांट जारी न करने पर आत्महत्या की धमकी दी थी। कुलपति ने पत्र मिलते ही स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की डीन प्रो. अनुराधा को मामले की पूरी जांच के साथ रिपोर्ट बनाने के लिए कहा था।