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IIT दाखिले में सीबीएसई, आईएससी छात्रों को राहत
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 25 Sep 2014 11:41 AM IST
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आईआईटी में दाखिले के लिए अर्हता नियम में परिवर्तन के बाद सीबीएसई और आईएससी के छात्रों को बड़ी राहत मिली है। जबकि उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों के लिए टॉप 20 परसेंटाइल का नियम ही लाभकारी होगा।
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आईआईटी ने जेईई एडवांस 2015 के लिए अनिवार्य अर्हता में परिवर्तन कर दिया है। इसके तहत अब छात्र को या तो अपने बोर्ड की टॉप 20 परसेंटाइल में आना होगा या फिर 12वीं में 75 प्रतिशत अंक लाने होंगे।
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छात्रों में खुशी
इस परिवर्तन के बाद सीबीएसई और आईएससी के छात्र खुश हैं, क्योंकि इन दोनों बोर्ड में ही टॉप 20 परसेंटाइल काफी ऊपर जाता था।
आईएससी में इस वर्ष सामान्य वर्ग की टॉप 20 परसेंटाइल 425(85 प्रतिशत), ओबीसी की 410(82 प्रतिशत), एससी की 404(80.8 प्रतिशत) और एसटी की 362(72.4 प्रतिशत) अंक पर आई थी जबकि सीबीएसई में 416(83.2 प्रतिशत), ओबीसी की 410(82 प्रतिशत), एससी की 370(74 प्रतिशत) और एसटी की 366(73.2 प्रतिशत) अंक आई थी।
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कइयों को होना पड़ा था दाखिले से वंचित
इससे जिन छात्रों ने आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास कर ली थी और इस आंकड़े में फिट नहीं बैठ रहे थे, वह आईआईटी में दाखिला नहीं ले पाए। दून में ऐसे भी कई छात्र हैं जो कि टॉप 20 परसेंटाइल में आने से चूक गए थे। वह सभी इन दिनों अंक सुधार परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
75 प्रतिशत अंक का नियम आ जाने के बाद अब यह छात्र भी बिना अंक सुधार परीक्षा दिए जेईई एडवांस परीक्षा दे सकते हैं। जेईई एडवांस की तैयारी कर रही सीबीएसई की छात्रा अलका भंडारी और प्रिया रावत का कहना है कि निश्चित तौर पर यह बेहतर निर्णय है, क्योंकि उन्हें टॉप 20 परसेंटाइल की चिंता नहीं है।
एक्सपर्ट कमेंट
वीआर क्लासेज के एमडी वैभव राय ने बताया कि तमाम ऐसे भी छात्र हैं जो कि हर साल टॉप 20 परसेंटाइल में न आने की संभावना की वजह से जेईई मेंस या एडवांस नहीं दे पाते थे। यह परिवर्तन उनके लिए भी लाभकारी होगा।
बलूनी क्लासेज के एमडी विपिन बलूनी का कहना है कि उत्तराखंड बोर्ड के छात्रों के लिए पूर्व का नियम ही सही है क्योंकि उत्तराखंड बोर्ड में टॉप 20 परसेंटाइल काफी कम था। इसमें सामान्य का 64.8, ओबीसी का 60.1, एससी का 58.8 और एसटी का 60 प्रतिशत शामिल है।