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AIPMT: जनरल में शामिल हुए जाट, नहीं मिलेगा आरक्षण

Fri, 29 May 2015 11:53 AM IST
Updated Fri, 29 May 2015 11:53 AM IST
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jat reservation not applied to aipmt

सुप्रीम कोर्ट की ओर से जाट आरक्षण रद्द किए जाने के बाद सीबीएसई ने आल इंडिया प्री मेडिकल टेस्ट का परिणाम घोषित होने से पहले जाट समाज के अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में शामिल कर दिया है।

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एआईपीएमटी में जाट आरक्षण खत्म हो जाने से हरियाणा के लगभग 15 हजार अभ्यर्थी प्रभावित होंगे। स्टेट कोटे के लिए ऐसे अभ्यर्थी 28 से 30 मई तक का समय  सीबीएसई की वेबसाइट पर आवेदन (अंडर टेकिंग) भेज सकते हैं।
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हरियाणा से हर साल करीब तीस हजार विद्यार्थी एआईपीएमटी  में शामिल होते हैं। इसमें 45 प्रतिशत अभ्यर्थी जाट समुदाय के हैं। वर्ष 2015 की एआईपीएमटी के लिए अभ्यर्थियों ने ओबीसी केटेगरी के तहत आवेदन किया था।
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मार्च 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने जाटों के आरक्षण को समाप्त कर दिया। सीबीएसई सूत्रों के अनुसार इसके मद्देनजर सीबीएसई ने भी परीक्षा का परिणाम घोषित करने से पहले इन सभी अभ्यर्थियों को सामान्य वर्ग में डाल दिया है।

केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका डाली

jat reservation not applied to aipmt

इस फैसले से जाट बिरादरी में रोष फैलने लगा है। जाट आरक्षण संघर्ष समिति हरियाणा के प्रदेश प्रवक्ता आरएस मलिक के अनुसार आरक्षण रद्द करने के खिलाफ केंद्र सरकार ने पुनर्विचार याचिका डाल रखी है।

हमने केंद्र सरकार से जाट समाज के हजारों युवाओं के भविष्य को बचाने के लिए याचिका पर फैसला आने तक  रिजल्ट रोकने की मांग की थी, जिस पर सुनवाई नहीं की गई। काजला खाप के प्रदेश अध्यक्ष राजमल काजल का कहना है कि सरकार ने हमारे साथ धोखा किया है।

आईआईटी, पीएमटी, सिविल सर्विस सहित अन्य परीक्षाओं में जहां आधे-आधे अंक से फैसला होता है, वहां हमारे बच्चे बाहर हो गए। झोरड़ खाप प्रधान विनोद झारड़ ने इसे जाट युवाओं के करिअर से खिलवाड़ बताते हुए कहा कि इसे सहन नहीं किया जाएगा। सरकार को राहत देने के लिए काम करना चाहिए।

जुलाई तक इंतजार फिर आंदोलन

अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक का कहना है कि केंद्र सरकार दोहरा मापदंड अपना रही है। एक तरफ कहा जा रहा है कि जाट बिरादरी के बच्चों का कोई नुकसान नहीं होने दिया जाएगा, लेकिन एक के बाद एक ऐसे फैसले लेकर जाट विद्यार्थियों को पीछे हटाया जा रहा है।

सीबीएसई का यह फैसला गलत है। जुलाई तक सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है, उसके बाद आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।

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