PG में 30 नंबर का होगा इंटरनल असेसमेंट
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किताबी ज्ञान के साथ-साथ स्टूडेंट्स को अब
अपने सब्जेक्ट की समझ रखने के साथ ही उसे प्रेजेंटेबल बनाना, विभिन्न तरीकों के असाइनमेंट पूरे करना, रेग्युलर क्लास करने के भी नंबर अब स्टूडेंट्स को मिलेंगे।
इस इंटरनल असेसमेंट के 30 नंबर होंगे, 15 नंबर की मिड सेमेस्टर परीक्षा व क्लास टेस्ट, 10 नंबर ग्रुप-इंडीव्यूजुअल असाइनमेंट व प्रेजेंटेशन के होंगे, पांच नंबर उपस्थिति के होंगे।
लिखित परीक्षा के 70 नंबर होंगे। इसी इंटरनल असेसमेंट के आधार पर पीजी के हर सेमेस्टर में छात्रों का मूल्यांकन किया जाएगा।
बुधवार को लविवि के कुलपति डॉ. एसबी निमसे के साथ विभागाध्यक्षों की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया।
सभी विभागों को निर्देश दिए गए कि वे 30 अगस्त तक अपने-अपने बोर्ड ऑफ स्टडी से इसे पास कराएं। इसके बाद सितंबर में फैकल्टी बोर्ड की बैठक में इसे पास कराया जाएगा।
फिर तीन को अकेडमिक काउंसिल व चार सितंबर को कार्यपरिषद की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लगाकर इसी सत्र से इसे लागू कराया जाएगा।
एलयू
के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि पीजी कोर्सेज में हर
डिपार्टमेंट में इस व्यवस्था को लागू कराने का नतीजा होगा कि वर्ष भर
छात्रों को मेहनत करनी होगी।
अभी तक हर सेमेस्टर में 100 नंबर की लिखित
परीक्षा होती है, जिसें इंड सेमेस्टर एग्जाम कहते हैं। अब यह 70 नंबर का
होगा।
30 नंबर को इस तरह विभाजित किया गया है कि स्टूडेंट्स को सेमेस्टर
एग्जाम पास करने में मेहनत करनी पड़े। 15 नंबर की मिड सेमेस्टर या फिर
क्लास टेस्ट होंगे।
यह क्लास टेस्ट किसी भी दिन लिया जा सकता है। ऐसे में
स्टूडेंट्स को अब हर दिन क्लास करनी ही होगी। अगर उसने लापरवाही की तो यह
महत्वपूर्ण नंबर निकल जाएंगे।
इसके अलावा समूह-व्यक्तिगत असाइनमेंट व
प्रेजेंटेशन के भी 10 नंबर होंगे। यह भी क्लास में स्टूडेंट्स को किसी भी
समय आवंटित किए जाएंगे।
इससे स्टूडेंट्स को अपने असाइनमेंट तैयार करने में
क्रिएटिविटी दिखानी होगी। ऐसे में उसके व्यक्तित्व का बेहतर विकास भी होगा।
वहीं पांच नंबर उपस्थिति के होंगे।
अभी तक उपस्थिति के कोई अंक न होने के
कारण स्टूडेंट्स क्लास में कम आते थे, तब भी वे पास हो जाते थे लेकिन अब वे
क्लास बंक नहीं कर पाएंगे। उन्हें सेमेस्टर की पढ़ाई अब ढंग से करनी होगी।
सितंबर 2015 में नैक मूल्यांकन की तैयारी
एलयू
को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद ने बी ग्रेड दिया। विवि को
2.76 CGPA मिला, जबकि 3.01 CGPA होने पर उसे ए ग्रेड यूनिवर्सिटी का
दर्जा मिल सकता है।
यूनिवर्सिटी मात्र 0.24 CGPA से ए ग्रेड से चूक गई।
यूनिवर्सिटी प्रशासन के सूत्रों की मानें तो नैक टीम की ओर से जो सुझाव दिए
गए हैं, उसमें एकेडमिक रिफॉर्म सबसे ऊपर है। इन सब में सुधार लाते हुए
विवि दोबारा सितंबर 2015 में नैक मूल्यांकन करवाने की तैयारी कर रहा है।
अगले सत्र से चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम
एलयू
में विभागाध्यक्षों की बैठक में चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू करने पर
भी विचार किया गया। एलयू प्रशासन के अधिकारियों ने सलाह दी कि इस सत्र से
इंटरनल असेसमेंट की व्यवस्था लागू हो रही है, अगले सत्र से चॉइस बेस्ड
क्रेडिट सिस्टम लागू कर दिया जाएगा।
एलयू प्रशासन ने चॉइस बेस्ड क्रेडिट
सिस्टम लागू करवाने के लिए एक कमेटी भी बना रखी है। फिलहाल, अब कमेटी की
रिपोर्ट के आधार पर इसे अलगे शैक्षिक सत्र 2015-16 से पीजी में लागू कर
दिया जाएगा।
चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम लागू होने से यह फायदा होगा कि
आर्ट्स, साइंस व कॉमर्स आदि सब्जेक्ट के स्टूडेंट एक-दूसरे कोर्स को अपने
मूल कोर्स के साथ पढ़ सकेंगे।