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RTE जांच के नाम पर स्कूलों का 'तुगलकी' फरमान

Sun, 09 Aug 2015 01:04 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 09 Aug 2015 01:04 PM IST
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inspection on admission based on right to education.

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत देहरादून के कई निजी स्कूलों में अपात्रों के दाखिलों के खुलासे के मामलों की चल रही जांच के बीच अब स्कूल ऐसे बच्चों से पीछा छुड़ाने लगे हैं।

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हेरिटेज स्कूल ने आरटीई वाले बच्चों के अभिभावकों को फिलहाल 10 दिन तक स्कूल नहीं भेजने का फरमान सुना दिया है। स्कूल के इस फरमान से अभिभावकों में रोष है। उनका कहना है कि अगर जांच चल रही है तो उसकी रिपोर्ट आने तक उनके बच्चों को स्कूल से वंचित क्यों किया जा रहा है?
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आरटीई के तहत हुए गलत दाखिलों पर शिक्षा विभाग की ओर से जांच की जा रही है। ‘अमर उजाला’ में कई मामले प्रकाशित हुए थे, जिनकी जांच चल रही है। जसवंत मॉर्डन और मार्शल स्कूल ने एडमिशन की सूची शिक्षा विभाग को जांच के लिए लौटा दी है।

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जांच के लिए शिक्षा विभाग को भेजा पत्र

inspection on admission based on right to education.

इस कड़ी में हेरिटेज स्कूल ने शिक्षा विभाग को दाखिलों की जांच का मांग पत्र भेजा है। आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की ओर से उन्हें जांच का हवाला देकर बच्चों को स्कूल नहीं भेजने का फरमान सुनाया गया है, जोकि कतई उचित नहीं है।

शनिवार को कुछ अभिभावक स्कूल पहुंचे, लेकिन छुट्टी होने की वजह से वहां कोई नहीं मिला। अभिभावकों ने मांग की है कि बेशक दाखिलों और उनकी हैसियत की जांच की जाए, लेकिन रिपोर्ट आने तक उनके बच्चों को पढ़ाई से वंचित न किया जाए।

वहीं, हेरिटेज स्कूल के चेयरमैन अवधेश चौधरी का कहना है कि हमने जांच के लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेजा है। अब जांच होगी, इसके बाद आगे कुछ हो सकेगा।

इस संबंध में नगर शिक्षा अधिकारी इंद्रमणि बलोदी का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने तक किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। ऐसा है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

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