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इंडस्ट्री एक्सपर्टस भी लेंगे स्टूडेंट्स की क्लास
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 08 Jan 2014 09:16 AM IST
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अब इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञ और कंपनियों के अधिकारी भी पढ़ाने आएंगे। कॉलेजों में इंडस्ट्री के विशेषज्ञों के अलावा पीडब्ल्यूडी, एनएचआई, सिंचाई विभाग के अधिकारी भी पढ़ाने आएंगे।
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इसके लिए कॉलेजों में ऑनरेरी विजिटिंग प्रोफेसर का पद सृजित किया जाएगा। उन्हें प्रति लेक्चर के अनुसार मानदेय का भुगतान किया जाएगा।
यह निर्णय मंगलवार को उप्र प्राविधिक विश्वविद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। वहीं बीते करीब चार वर्षों से बंद चल रही यूपीटीयू की टीचिंग एंड रिसर्च स्कॉलरशिप को दोबारा शुरू करने का निर्णय भी लिया गया है।
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इसके तहत अब एमटेक पास स्टूडेंट सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में रिसर्च के साथ-साथ क्लास भी लेंगे। इन्हें स्कॉलरशिप के तहत लेक्चरर के बराबर मानदेय दिया जाएगा।
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यूपीटीयू के प्रति कुलपति प्रो. दिवाकर सिंह यादव ने बताया कि टीचिंग एंड रिसर्च स्कॉलरशिप बीते करीब चार वर्षों से बंद थी।
इसे दोबारा शुरू करने का फायदा यह होगा कि स्टूडेंट को रिसर्च के साथ-साथ जूनियर स्टूडेंट्स की क्लास लेने का भी मौका मिलेगा।
यूपीटीयू उन्हें इसके लिए स्कॉलरशिप भी देगा। इससे इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक बढ़ जाएंगे। यह स्कॉलरशिप अधिकतम पांच वर्षों के लिए दी जाएगी।
वहीं ऑनरेरी विजिटिंग प्रोफेसर पद पर इंडस्ट्री में कई वर्षों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ और कंपनियों व विभागों के अधिकारियों को बुलाया जाएगा।
इससे जहां टीचिंग में एक्सपर्ट की कमी पूरी होगी और वहीं फैकल्टी को भी काफी कुछ सीखने को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में एमटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का कोर्स शुरू होगा।
इसमें अभी 20 सीटें होंगी। इसी के साथ यूपीटीयू प्रशासन ने देश-विदेश की नामचीन शिक्षण संस्थाओं के साथ एमओयू साइन करने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है।
यह कमेटी देखेगी कि किन-किन संस्थानों से और किन-किन क्षेत्रों में एमओयू साइन किया जाए। इसी के साथ यूपीटीयू ने 11 जनवरी को होने वाले दीक्षांत समारोह में देश में सूचना प्रौद्योगिकी के जनक सैम पित्रोदा को डीएससी की मानद उपाधि देने का निर्णय लिया है।
वहीं यूपीटीयू में फर्स्ट ईयर में बदले गए नए पाठ्यक्रम पर भी एकेडमिक काउंसिल ने अपनी मुहर लगा दी है।
इन्हें मिला एक और मौका
यूपीटीयू प्रशासन ने सात वर्ष से अधिक समय से पीएचडी कर रहे स्टूडेंट़स को एक मौका और दे दिया है। अब सभी केस का अध्ययन कर उस पर सुपरवाइजर और डिपार्टमेंट रिसर्च कमेटी की राय लेने के बाद कुलपति अंतिम निर्णय लेंगे।
अभी इन स्टूडेंट की पीएचडी नियमों के फेर में फंस गई थी लेकिन अब इन्हें पीएचडी पूरा कने का एक मौका दिया जा रहा है। इन्हें छूट दे दी गई है। फिलहाल इससे उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।