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बोर्ड की कॉपियां जांचने में लगा दी मृतकों की भी ड्यूटी
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Fri, 18 Apr 2014 12:21 PM IST
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यूपी बोर्ड में लापरवाही का आलम यह है कि स्वर्गवासी हो चुके गुरूजी को भी परीक्षक बना दिया गया। एक-दो नहीं बल्कि कई ऐसे परीक्षकों के नाम परिषद की सूची में शामिल हैं, जिनका देहांत हो चुका है।
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इसके अलावा 15 प्रतिशत ऐसे परीक्षकों की मूल्यांकन में ड्यूटी लगा दी गई है जो रिटायर होने के बाद वर्षों पहले शहर भी छोड़ चुके हैं। परिषद की लापरवाही से केंद्रों पर मूल्यांकन कार्य प्रभावित हो रहा है।
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प्रैक्टीकल में भी ऐसी लापरवाही सामने आई थी। सेठ मुकुंद लाल इंटर कालेज में भौतिक विज्ञान के लिए जिस परीक्षक को नियुक्त किया गया था, उनकी देहांत हो चुका था। बाद में नए सिरे से परीक्षक नियुक्त किया गया। इससे प्रैक्टीकल में देरी हुई। मूल्यांकन में भी ऐसी गलतियां सामने आ रही हैं।
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शंभू दयाल इंटर कालेज में लगाए गए कुल 350 परीक्षकों में महज 342 परीक्षकों ही वर्तमान में मौजूद हैं, इनमें से 315 ही केंद्र पर पहुंच रहे हैं। अन्य आठ परीक्षकों का कोई अता पता नहीं, इनमें से कई की मौत हो चुकी है तो कई रिटायरमेंट के बाद शहर छोड़ कर जा चुके हैं।
सेठ मुकुंद लाल इंटर कालेज के प्रिंसिपल केवी सिंह बताते हैं कि परिषद द्वारा भेजी गई डीएचई की सूची में 30 में से महज 8 डिप्टी हेड एग्जामनर ही केंद्र पर आए, इनके अलावा सभी नए सिरे से डीएचई नियुक्त किए गए हैं।
केंद्र व्यवस्थापक कहते हैं कि प्रत्येक वर्ष परिषद को अपडेट परीक्षकों की सूची भेजी जाती है, जबकि परिषद हर बार पुरानी सूची के हिसाब से ही ड्यूटी लगाता है।