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यूटी प्रशासन की शान हैं ये आईआईटियन

Fri, 08 Nov 2013 12:50 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 08 Nov 2013 12:50 PM IST
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IIT Students in UT administration
यूटी प्रशासन पर अब आईआईटी के पूर्व छात्रों का कब्जा है। फिलहाल यूटी में तीन अधिकारी आईआईटी के पूर्व छात्र हैं। जनवरी में अगर वित्त सचिव के पद पर पंजाब के आईएएस अधिकारी अनुराग अग्रवाल ज्वाइन कर लेते हैं तो प्रशासन में आईआईटी के इंजीनियरों की संख्या चार हो जाएगी।
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ये चारों आईआईटी दिल्ली और आईआईटी कानपुर के छात्र रह चुके हैं। चंडीगढ़ के प्रशासन ने अगले वित्त सचिव के लिए 1990 बैच के आईएएस अधिकारी अनुराग अग्रवाल का नाम केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को प्रस्तावित किया गया है। अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर से मेकेनिकल इंजीनियरिंग में करने के बाद आईआईटी दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएशन की थी।
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चंडीगढ़ के गृह सचिव और हरियाणा के आईएएस अधिकारी अनिल कुमार ने मेकेनिकल इंजीनियरिंग में आईआईटी दिल्ली से बीटेक की थी।

दो महीने पहले चंडीगढ़ प्रशासन में ज्वाइन करने वाली पंजाब कैडर की 1999 बैच की आईएएस भावना गर्ग ने आईआईटी कानपुर से केमिकल इंजीनियरिंग की थी।

हाल ही में चंडीगढ़ में पहली पोस्टिंग लेने वाले यूटी कैडर के आईएएस और चंडीगढ़ के एसडीएम (साउथ) कशिश मित्तल ने आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की थी।
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इनके अलावा चंडीगढ़ के प्रशासक के सलाहकार सिविल इंजीनियर हैं, जबकि मौजूदा वित्त सचिव वीके सिंह मेकेनिकल इंजीनियर हैं।

अर्थशास्त्री भी हैं अधिकारी
चंडीगढ़ में विभिन्न पदों पर तैनात कई आईएएस अधिकारी इंजीनियर हैं तो कई अर्थशास्त्री भी हैं। सीएचबी के चेयरमैन सत्यगोपाल इकॉनोमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट हैं तो यूटी कैडर की आईएएस, सिटको की एमडी व चंडीगढ़ की एडीसी तन्वी गर्ग भी इकॉनोमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट हैं।

गृह सचिव अनिल कुमार ने बीटेक करने के बाद इकॉनोमिक्स में एमए भी की थी। इसके बाद उन्होंने एलएलबी भी की थी। चंडीगढ़ में तैनात आईएएस अधिकारी प्रेरणा पुरी ने मनोविज्ञान और एसडीएम (ईस्ट) दानिश अशरफ ने इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन की है जबकि उपायुक्त मोहम्मद शाईन एमबीए हैं।


डॉक्टर के पास होगी पुलिस की कमान
चंडीगढ़ पुलिस की कमान अब एक डॉक्टर के हाथ आने वाली है। पंजाब कैडर के वर्ष 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी डॉ. सुखचैन गिल का चंडीगढ़ का एसएसपी बनना तय है।

पंजाब सरकार द्वारा दूसरी बार भेजे गए आईपीएस अधिकारियों के पैनल में से चंडीगढ़ प्रशासन ने डॉ. गिल का नाम एमएचए को प्रस्तावित किया है। डॉ. गिल एमबीबीएस करने के बाद आईपीएस बने थे। उन्होंने अमृतसर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की थी।
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