उत्तराखंड के टॉपरों से जाने सक्सेस का 'शॉर्टकट'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पढ़ाई के लिए न तो कभी दिन-रात एक किया और न पढ़ाई को बोझ ही बनने दिया। नियमित तीन घंटे पढ़ाई की। परीक्षा का शेड्यूल पूरे साल भर एक जैसा रखा।
यह कहना है आईएससी 12वीं के नतीजों में 99 प्रतिशत अंक लाकर उत्तराखंड टॉप करने वाली ब्राइटलैंड स्कूल की छात्रा गुरसिमरन का। गुरसिमरन अब बीकॉम ऑनर्स के बाद आईआईएम से एमबीए करना चाहती हैं। बताया कि इसकी तैयारी में वह जुटी हुई हैं।
टॉपर बनने के बाद कॉमर्स की छात्रा गुरसिमरन ने अपनी सफलता के अनुभव साझा किए। टीवी देखने की शौकीन गुरसिमरन ने बताया कि सालभर की पढ़ाई आपको परीक्षा के समय में आसानी करा देती है। कई छात्र सालभर मस्ती करने के बाद परीक्षा से ठीक एक महीने पहले तैयारी शुरू करते हैं तो दबाव और तनाव के चलते वे कामयाबी से दूर रहते हैं।
गुरसिमरन ने परीक्षा खत्म होने के बाद 97 प्रतिशत से ऊपर अंक का अंदाजा लगाया था। व्यापारी पिता अमरदीप सिंह और मां मीनू गंभीर की बेटी गुरसिमरन अब दिल्ली विवि से बीकॉम ऑनर्स करने के बाद आईआईएम से एमबीए करना चाहती हैं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल की ओर से आपको जो भी काम दिया जाए, उसे जरूर गंभीरता से पूरा करें। कोचिंग के सवाल पर उनका कहना है कि यह आप पर निर्भर करता है कि आप कोचिंग करना चाहते हैं या केवल सेल्फ स्टडी ही पर्याप्त है।
टॉपर की मार्कशीट
इकोनॉमिक्स : 100
मैथ्स : 100
अकाउंट्स : 100
इंग्लिश: 96
कॉमर्स : 98
पापा की ख्वाहिश ‘सार्थक’ की
रेलवे के पूर्व अधिकारी स्व. सुनील बलूनी के बेटे सार्थक ने आज अपने नाम के अर्थ को सार्थक कर दिखाया। पिता की दो दिसंबर 2014 को मौत हो गई थी। सुसाइड नोट में बलूनी ने अपने बेटे से पढ़कर आगे बढ़ने की जो ख्वाहिश जताई थी, उसे आज उनके सुपुत्र ने पूरा कर दिखाया।
रेलवे के पूर्व ट्रैफिक इंस्पेक्टर सुनील बलूनी के बेटे सार्थक बलूनी ने 10वीं की परीक्षा में 93.2 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। सोमवार को जब आईसीएसई का परिणाम आया तो सार्थक के चेहरे पर एक अलग ही खामोशी और जीत की गुमनाम खुशी देखने को मिली।
बड़ी बात ये है कि बेहद विकट विपत्तियों में सार्थक ने यह कामयाबी हासिल की है। पिता ने जो पत्र परिवार के लिए छोड़ा था, उसके मुताबिक उन्हें दलालों ने गलत आरोपों में फंसवाया है। सार्थक की मां सरोज बलूनी ने बताया कि उनके पति हमेशा ईमानदारी के लिए जिए।
इस ईमानदारी ने ही उन्हें हमसे भले दूर कर दिया हो लेकिन बेटे ने 93.2 प्रतिशत अंक लाकर दिखा दिया कि ईमानदार बाप का बेटा भी एक दिन नाम कमाएगा। पिता की याद ताजा होते ही सार्थक के चेहरे के भाव बदल गए। उन्होंने बताया कि जब पापा उन्हें छोड़कर गए थे तो वह समय बहुत कठिन था।
पढ़ाई में मन नहीं लगता था। लगता था जैसे दुनिया ही उजड़ गई है। परिवार और रिश्तेदारों ने हौसला बढ़ाया और वह स्कूल जाने लगे। उनके दोस्त और स्कूल प्रशासन ने इस मामले में पूरा सहयोग किया। धीरे-धीरे उन्होंने परीक्षा में एकाग्रता बढ़ाई जो रिजल्ट के तौर पर सामने हैं। सार्थक अब एनडीए में जाकर देश की सेवा करना चाहते हैं।