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ISC रिजल्ट में अंग्रेजी ने देहरादून को किया पीछे

Sun, 18 May 2014 02:33 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 18 May 2014 02:33 PM IST
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ics result 2014

आईएससी परिणाम में छात्रों पर अंग्रेजी की मार पड़ी है। अन्य विषयों में बेहतर अंक पाने वाले कई छात्र अंग्रेजी में पिछड़ गए।

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95 से अधिक अंक नहीं ले सके दून के छात्र
इसका असर उनके ओवरआल रिजल्ट पर भी पड़ा है। गत वर्ष भुवन्या विजय आईएससी टॉपर रही थीं। अंग्रेजी में उन्होंने 98 अंक हासिल किए थे, लेकिन इस बार अब तक हासिल हुए रिजल्ट में दून के छात्र 95 से अधिक अंक नहीं ले सके हैं।

माना जा रहा है कि अगर अंग्रेजी में अंक अच्छे होते तो दून नैवेद्य बंसल के रूप में इस बार फिर आल इंडिया टॉपर दे सकता था।

दून में देर रात तक जारी रिजल्ट में नैवेद्य बंसल 98.50 प्रतिशत अंकों के साथ पहले स्थान पर थे। अंग्रेजी में अब तक सर्वाधिक 95 अंक भी नैवेद्य के हैं। गत वर्ष आल इंडिया टॉपर दून की भुवन्या विजय ने अंग्रेजी में 98 अंक प्राप्त किए थे।
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अगर नैवेद्य भी 98 अंक पा जाते तो ओवरआल 99.25 प्रतिशत के साथ वह आल इंडिया टॉपर बन जाते। वहीं, दूसरे स्थान पर रहे त्रिशला, प्रखर, सुयष विष्णोई, तीसरे स्थान पर रहे शांतनु त्रिपाठी ने अंग्रेजी में 94 अंक हासिल किए हैं।
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इनके अंक भी अच्छे होते तो ये टॉपर हो सकते थे। छात्रों का कहना है कि इस बार इंगलिश का पेपर काफी मुश्किल आया था, जिससे स्कोर डाउन हो गया।

मैथ्स, सीएस में लगे शतक

अंग्रेजी ने भले मारा हो, लेकिन गणित और कंप्यूटर साइंस में शतक लगाने वाले छात्रों की बड़ी संख्या रही।

नैवेद्य बंसल ने मैथ्स और कंप्यूटर में 100, त्रिशला सिंह ने फिजिक्स और कंप्यूटर साइंस में 100, प्रखर गुप्ता ने फिजिक्स और मैथ्स में 100, सुयष विष्णोई ने मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में 100, शांतनु त्रिपाठी ने कंप्यूटर में 100 अंक प्राप्त किए।


इसके अलावा वृंदा जैन ने मैथ्स व कंप्यूटर साइंस में, वसुंधरा सिंह ने मैथ्स में, सारांश सिंह ने मैथ्स में, तरुण भटनागर ने मैथ्स में शतक लगाया।

इस बार अंग्रेजी लिटरेचर का पेपर बेहद अप्रत्याशित था। बोर्ड ने पहली बार गत वर्ष के कई प्रश्न रिपीट कर दिए थे। छात्र सामान्यत: दस साल के पुराने पेपरों से तैयारी करते हैं, लेकिन एक साल पहले का पेपर इसलिए छोड़ देते हैं कि उससे सवाल आने की संभावना नगण्य रहती है। अप्रत्याशित पेपर की वजह से ही छात्रों की अंग्रेजी में परफारमेंस कम रही।
- रिमी नौटियाल, अंग्रेजी शिक्षिका, दून कैंब्रिज स्कूल

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