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एचपीयू के योगा विभाग को भवन तक नसीब नहीं

Sun, 12 Oct 2014 07:36 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला,शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला,शिमला Updated Sun, 12 Oct 2014 07:36 PM IST
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प्रदेश विश्वविद्यालय का योगा विभाग चंद कमरों में चल रहा है। शिक्षकों के लिए आठ बाई आठ के छोटे कमरे, तो क्लास रूम सिर्फ एक है। योग की सुबह की कक्षाएं फिजिक्स विभाग के टॉप फ्लोर में मिले हॉल में चलती हैं।

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विभाग में एक दो वर्षीय डिग्री कोर्स तो एक साल का डिप्लोमा कोर्स भी चल रहा है। लेकिन विभाग में वर्तमान में एक भी रेगूलर शिक्षक नहीं है। विभागाध्यक्ष की कुर्सी भी विजुअल आर्ट विभागाध्यक्ष ही तीन माह से संभाल रहे है।
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योग सिखाने का पूरा जिम्मा गेस्ट फेकल्टी के जिम्मे है। चार गेस्ट फैकल्टी जिनमें दो सेवानिवृत्त शिक्षक और दो अन्य शिक्षक कार्य कर रहे हैं। विभाग के पास एक क्लास रूम, दो शिक्षकों के कमरे और एक ऑफिस का छोटा सा कमरा उपलब्ध है।
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पहले विभाग में सिर्फ डिप्लोमा कोर्स चलता था, तो काम चल जाता था लेकिन दो साल पूर्व पीजी कोर्स शुरू होने पर यह अलग विभाग जरूर बना। लेकिन इसमें शिक्षकों की तैनाती के साथ मूलभूत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं दिया गया।

ऐसे में पढ़ रहे छात्र सिर्फ उपलब्ध नाममात्र सुविधाओं में ही गुजारा करने को मजबूर हैं। दूसरी और वर्तमान में विभागाध्यक्ष का कार्यभार संभाल रहे विजुअल आर्ट विभागाध्यक्ष प्रो. हिम चटर्जी सिर्फ विभाग संचालन का कार्य जरूर कर रहे हैं।

लेकिन उन्हें विभाग और इसके कोर्स के बारे में जानकारी नहीं। हाल ही में विश्वविद्यालय ने परीक्षा की फीस बढ़कर औसतन एक छात्र को एक हजार से बारह सौ का अतिरिक्त बोझ जरूर डाला है।

विभाग में सौ से अधिक छात्र
एमए की कक्षाएं शुरू हुए पांच साल का समय हो चुका है। डिग्री शुरू होेने पर विभाग में औसतन सौ से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इनमें डिग्री कोर्स में एमए योग स्टडीज में 15 सब्सिडाइज्ड और 15 नॉन सब्सिडाइजड सीटें हैं।


इनमें नॉन सब्सिडाइज्ड कोर्स की फीस 10 हजार प्रति वर्ष और डिप्लोमा की 60 सीटों की फीस 7500 रुपये है। नान सब्सिडाइज्ड सीट का ही विभाग में लाखों में पैसा एकत्र होता है, जिसे छात्रों की सुविधाओं पर नाम मात्र ही खर्च किया जाता है।

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