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पढ़िए, रिटायर शिक्षकों पर कैसे मेहरबानी दिखा रहा है एचपीयू?
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 20 Jun 2015 10:45 AM IST
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प्रदेश विश्वविद्यालय में जहां आधे से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं वहीं गेस्ट फैकल्टी में भी यूजीसी के तय मानकों के मुताबिक प्रति पीरियड मानदेय नहीं दिया जा रहा है। हालांकि विवि का शैक्षणिक कार्य गेस्ट फैकल्टी के सहारे ही चल रहा है। इसमें दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। एचपीयू प्रशासन सिर्फ सेवानिवृत्त शिक्षकों पर मेहरबान है।
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उन्हें यूजीसी के तय रेट के मुताबिक एक हजार प्रति पीरियड के हिसाब से पढ़ाने का मानदेय अदा किया जाता है। अन्य शिक्षकों को फैकल्टी में पांच सौ रुपये प्रति पीरियड के हिसाब से पैसे दिए जा रहे हैं। एचपीयू के लगभग हर विभाग में वर्तमान में रिक्त पदों पर गेस्ट फैकल्टी के तहत ही पढ़ाई का कार्य चल रहा है।
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इनमें यूआईआईटी, यूसीबीएस, यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज (बीबीए, बीसीए) यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट आफ लीगल स्टडीज (पांच वर्षीय) सहित एमसीए सहित एचपीयू के इंस्टीट्यूट ऑफ इवनिंग स्टडीज जैसे संस्थानों में आधे से अधिक शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के रूप में शिक्षण कार्य निपटाते आ रहे हैं।
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हिंदी, सोशल वर्क, समाज शास्त्र, योगा स्टडीज, एडल्ट एजूकेशन, संस्कृत और विजुअल आर्ट सहित करीब हर विभाग में जहां या तो रेगुलर शिक्षक है ही नहीं या फिर रेगुलर शिक्षक कम हैं। इन गेस्ट फै कल्टी को पांच सौ रुपये प्रति लेक्चर के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। एचपीयू और रिजनल सेंटर के साथ अन्य संस्थानों में चल रही रिक्तियों को देखते हुए करीब सात सालों से हर सत्र में करीब 150 से अधिक गेस्ट फैकल्टी ही शिक्षण कार्य का मोर्चा संभाले हुए हैं।
लेकिन उन्हें सिर्फ पांच सौ प्रति लेक्चर के हिसाब से मानदेय दिया जाता है। पूर्व कुलपति डा. सुनील गुप्ता के कार्यकाल में इसे ढाई सौ से पांच सौ किया गया था। उसके बाद इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। सालों से गेस्ट फैकल्टी के रूप में कार्य कर रहे शिक्षक मानदेय बढ़ोतरी की लगातार मांग करते आ रहे हैं लेकिन अभी तक इस बाबत कोई फैसला नहीं हो पाया है।
ये हैं यूजीसी के तय मानक
यूजीसी के एक जनवरी 2010मानकों के मुताबिक पात्रता शर्त पूरी करने वाले को भी सेवानिवृत्त शिक्षकों की तरह एक हजार रुपये प्रति पीरियड मानदेय मिलना चाहिए। इसके लिए उसका नेट/सेट पास होना जरूरी होता है। हां अगर जिन विषयों में नेट नहीं है उन्हें पात्रता शर्त में रियायत दी जा सकती है।
इसमें गेस्ट फैकल्टी तैनाती को रेगुलर शिक्षक भर्ती की पूरी प्रक्रिया फॉलो होनी चाहिए। गेस्ट फैकल्टी स्वीकृत रिक्त पद पर ही होनी चाहिए। पात्रता शर्तें यूजीसी के रेगुलर शिक्षक वाली ही होनी चाहिए। सेवानिवृत्त शिक्षक को भी रखा जा सकता है उन्हें किसी तरह के भत्ते और किसी तरह की पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलेगी।
मासिक मानदेय की सीमा तय : प्रति कुलपति
विवि के प्रति कुलपति प्रो. राजेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि गेस्ट फै कल्टी की मासिक मानदेय की लिमिट 21,600 से बढ़ाकर 25000 रुपये कर दी है। अब गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति यूजीसी के तय मापदंडों के मुताबिक दी जाएगी।नई भर्ती होने पर भी समस्या हल हो जाएगी।