एचपीयू में खाली रह गईं एमफिल की सीटें
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एचपीयू में साल दर साल एमफिल की सीटें खाली रहने की संख्या बढ़ती जा रही है। एसएफआई की विवि इकाई का आरोप है कि सीटें खाली रहने के लिए विवि के बनाए नियम जिम्मेदार हैं। इस बार एमफिल प्रवेश में भूगोल विभाग में सात सीटें खाली रह गई हैं। राजनीति शास्त्र में चार, समाज शास्त्र में सिर्फ दो ही सीटें भर सकी हैं। लोक प्रशासन में 15 में से दो सीटें ही भरी गई हैं, अन्य विभागों में भी सीटें खाली रह गई हैं।
एसएर्फआ की विवि इकाई के अध्यक्ष नोबल और सचिव राहुल चौहान का आरोप है कि यूजीसी ने सिर्फ एमफिल के लिए प्रवेश परीक्षा करवाने की शर्त रखी है, मगर विवि प्रशासन टीचिंग स्टाफ और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी को देखते हुए अपने स्तर पर प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी अंक की शर्त लगाता आ रहा है।
प्रवेश परीक्षा में जानबूझ कर ऐसे मुश्किल सवाल पूछे जाते है, ताकि विभाग की सभी सीटें न भरें। बावजूद जो छात्र एमफिल में प्रवेश लेते है, उन्हें गाइड से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया नहीं हो रही हैं। इससे विवि में शोध कार्य का स्तर गिर रहा है। जो छात्र एमफिल में प्रवेश नहीं ले पाते, उनमें से ही छात्र नेट और जेआरएफ की यूजीसी की परीक्षाएं पास करते है।
छात्र नेताओं का आरोप है कि कुलपति और डीएस शोध को बढ़ावा देने की सिर्फ बातें कर रहे हैं, असल में अपनी नाकामियों को छुपाने को एमफिल की पूरी सीटें तक नहीं भरी जा रही हैं। एमफिल में प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी अंक की लगाई गई शर्त को हटाया जाए।
एचपीयू के गले की फांस बना एससीए का मनोनयन
मनोनयन से एससीए गठन का फार्मूला एचपीयू पर भारी पड़ गया है। कॉलेजों में हालांकि एससीए मनोनयन के बाद नई एससीए में चुनकर आए पढ़ाकू छात्र शपथ भी ले चुके हैं, मगर एचपीयू में शपथ तो दूर रिक्त हुए तीन मुख्य पदाधिकारियों के पद कैसे भरे जाएं, यही तय नहीं हो पाया है। एससीए अध्यक्ष, सचिव और सह सचिव ने पद से इस्तीफा दे दिया है।
24 सितंबर को मनोनीत एससीए की सूची जारी होने के बाद एक माह से अधिक का समय बीत चुका है। प्रशासन इन रिक्त पदों को कैसे भरा जाये इसका तरीका नहीं निकाल पाया है। इसी कारण एससीए की शपथ भी लटकी हुई है। विवि के अधिष्ठाता छात्र कल्याण ने मनोनयन से ही रिक्त पदों को भरने का तरीका जल्द निकालने का दावा 25 सितंबर को किया। मगर आज तक आगे की प्रक्रिया तय नहीं हो पाई।
प्रदेश विश्वविद्यालय में गठित विशेष कमेटी के तैयार किए एससीए मनोनयन के फार्मूले के मुताबिक कॉलेज और विश्वविद्यालयों में मनोनित एससीए की घोषणा कर दी गई थी। उसी रोज एचपीयू से एससीए में अध्ययक्ष, सचिव और सह सचिव ने त्यागपत्र दे दिया।
एक- दो दिन में फैसला: प्रो. चौहान
एचपीयू के अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एमएस चौहान का कहना है कि अगले एक से दो दिन में रिक्त पदों पर मनोनयन की प्रक्रिया पर फैसला ले लिया जाएगा।