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उप राष्ट्रपति ने 17 छात्रों को दिया गोल्ड मेडल, चार को मानद उपाधि

Tue, 09 Jun 2015 06:31 PM IST
Updated Tue, 09 Jun 2015 06:31 PM IST
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hpu 22nd convocation ceremony.

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सभागार में मंगलवार को 22वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। इसमें मुख्यातिथि रहे देश के उप राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने 17 फैकल्टी टॉपर और इंस्टीट्यूडिट अवार्ड विजेताओं को गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। उन्होंने अपने क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाली चार विभुतियों को को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया।

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समारोह में 106 टॉपर को गोल्ड मेडल और डिग्री वहीं, 139 मेधावियों को पीएचडी की डिग्री देकर सम्मानित किया गया। 17 गोल्ड मेडल विजेताओं के अलावा अन्य छात्रों को विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने गोल्ड मेडल और पीएचडी डिग्री प्रदान की।
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विश्वविद्यालय के इस दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश की सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य व बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मन्त्री कर्नल डॉ. धनी राम शांडिल भी शरीक हुए।
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उप राष्ट्रपति ने प्रदान की मानद उपाधी

hpu 22nd convocation ceremony.

दीक्षांत समारोह में भारत के उप-राष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी ने तीन महानुभावों को अपने क्षेत्र में बेहतरीन कार्य करने के लिए मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया। इनमें डा. गोविन्द व्यास कवि और व्यंग्यकार, प्रो.वेपा राव(वरिष्ठ  पत्रकार और एचपीयू के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष), डॉ. के. राधा कृष्णन (स्पेस साइंटिस्ट) रघुराम जी राजन को उनकी अनुपस्थित में मानद उपाधियां प्रदान कीं।

इससे पहले कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने महामहिम उप-राष्ट्रपति का हिमाचल प्रदेश विष्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में पधारने पर शॉल टोपी और समृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और विश्वविद्यालय समुदाय की ओर से आभार व्यक्त किया।

पर्यावरण पर सभी राज्यों का बने रिपोर्ट कार्ड : हामिद

hpu 22nd convocation ceremony.

उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 14वें वित्तायोग की सिफारिश का समर्थन करते हुए कहा कि सभी राज्यों के पर्यावरण संबंधी कार्य निष्पादन की जांच के लिए पर्यावरणीय संरक्षण सूचकांक (ईपीआई) तैयार होना चाहिए। सूचकांक के आधार पर ही राज्यों को केंद्रीय मदद दी जानी चाहिए। उपराष्ट्रपति मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि हिमालय प्राकृतिक आपदाओं की नजर से अति संवेदनशील है। विश्व की सबसे नई पर्वत शृंखला में आज भी पर्वत निर्माण की प्रक्रिया जारी है। भूगर्भीय शक्तियों की सक्रियता से होने वाली हलचल से भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, बादल फटने जैसे प्राकृतिक खतरों के लिहाज से यह अति सेंसटिव है। उन्होंने कहा कि मानव द्वारा की जाने वाली अति की कीमत सभी को चुकानी पड़ती।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण के परिवर्तन का सबसे अधिक असर आसपास रहने वालों पर होता है। उनका जीवन सबसे अधिक खतरे में होता है। किसी भी प्राकृतिक या मानव निर्मित पर्यावरणीय जोखिम का सबसे ज्यादा खतरा समाज के कमजोर वर्ग को है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए उन लोगों के विचारों को सबसे अधिक महत्व दिया जाना जरूरी है।

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