हजारों छात्रों को मिला गोल्डन चांस, फिर दे सकेंगे परीक्षाएं
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इंजीनियरिंग और बी-फार्मेसी में रि-अपीयर के करीब पांच हजार छात्रों के लिए बड़ी खबर है। इन्हें गोल्डन चांस का तोहफा मिला है। हालांकि, इसके लिए छात्रों को जेब ढीली करनी पड़ेगी। तकनीकी विवि ने 3000 रुपये की भारी भरकम फीस के साथ यह मौका दिया है। नवंबर और दिसंबर के बीच गोल्डन चांस मिलेगा।
गोल्डन चांस सिर्फ उन छात्रों को मिलेगा, जिन्होंने आठवें एवं अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की होगी। पुराने सिलेबस के छात्र ही इस चांस के लिए पात्र होंगे। गोल्डन चांस का लाभ लेने वाले छात्रों के लिए विवि ने परीक्षा फार्म भी नए प्रारूप में प्रकाशित करवाएं हैं। पुराने परीक्षा फार्म के साथ गोल्डन चांस के लिए आवेदन मान्य नहीं होंगे।
चांस मिलने से एक साल बचेगा
तकनीकी विवि नवंबर-दिसंबर के बीच दूसरे, चौथे, छठे तथा आठवें सेमेस्टर, जून माह में पहले, तीसरे, पांचवें और सातवें सेमेस्टर की परीक्षाओं का संचालन करता है। इन परीक्षाओं के परिणाम निकालने में दो से तीन माह का समय लगता है।
अगर विवि गोल्डन चांस नहीं देता तो रि-अपीयर वाले छात्रों को जून माह में परीक्षाएं देनी पड़तीं और रिजल्ट के लिए अगस्त व सितंबर माह तक का इंतजार करना पड़ता है। इसके चलते एमटेक और एम-फार्मेसी करने वाले छात्रों का एक साल का समय बर्बाद हो जाता। अब इन छात्रों के पास मौका है कि वे दोबारा फीस देकर परीक्षा में बैठ सकेंगे।
हिमाचल में 32 कॉलेज के छात्रों को फायदा
प्रदेश में वर्तमान में चार सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और 14 प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज हैं। इनमें सिविल इंजीनियरिंग, मेकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल इंजीनियरिंग और आटोमोबाइल में इंजीनियरिंग होती है। इसके अलावा 14 बी-फार्मेसी कॉलेज हैं। इनमें दो सरकारी और 12 प्राइवेट हैं। इनमें हर साल हजारों की संख्या में छात्र शिक्षा ग्रहण करते हैं।
तकनीकी विवि के कुलपति प्रो. आरएल शर्मा का कहना है कि प्रदेश तकनीकी विवि ने अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा पास कर चुके रि-अपीयर के छात्रों को गोल्डन चांस देने का निर्णय लिया है। इनकी परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर माह में होंगी। परीक्षार्थी 3000 हजार रुपये परीक्षा शुल्क भरना होगा। छात्रों का एक साल का समय बर्बाद होने से बच जाएगा।