अरे वाह! एंट्रेस में हो चाहे एक ही अंक फिर भी मिलेगा दाखिला
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हिमाचल में बीएड करने के लिए एंट्रेंस में 35 फीसदी की शर्त भी हटा दी गई है। अभ्यर्थी को एंट्रेंस में केवल बैठना होगा। एंट्रेंस में बैठने के साथ ही वो एडमिशन के लिए पात्र हो जाएगा। इस सत्र में बीएड दो साल की गई है, लेकिन अभी भी हजारों सीटें खाली रह गई हैं। निजी कॉलेजों की सीटें भरने के लिए सरकार ने बड़ी राहत दी है।
बीएड में हर वो अभ्यर्थी एडमिशन का पात्र होगा, जिसने इस बार बीएड का एंट्रेंस दिया है। चाहे प्रवेश परीक्षा में उसने एक ही अंक प्राप्त किया है। प्राप्तांक की शर्त हटाए जाने को लेकर जारी आदेशों के प्राप्त होते ही एचपीयू के शिक्षा विभाग ने सभी निजी बीएड कॉलेजों में रिक्त रही सीटों को भरने को कह दिया है। निजी बीएड कॉलेज प्रवेश परीक्षा में बैठे सभी छात्रों को अपने स्तर पर प्रवेश दे सकेंगे।
एचपीयू ने जारी किए दिशा निर्देश
एचपीयू के शिक्षा विभागाध्यक्ष ने 15 सितंबर तक नई लागू की गई शर्त के मुताबिक प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर विभाग को सूचित करने के दिशा- निर्देश भी जारी कर दिए हैं, इसे विवि की वेबसाइट पर भी उपलब्ध करवा दिया गया है। छात्र व कॉलेज इस बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं।
एचपीयू शिक्षा विभागाध्यक्ष प्रो. सुदर्शना राणा ने माना कि अब प्रवेश परीक्षा में प्राप्तांक की शर्त को हटा दिया गया है। प्रदेश सरकार की ओर अतिरिक्त मुख्य सचिव के मिले आदेशों के मुताबिक सभी निजी कॉलेजों को दिशा- निर्देश जारी कर दिए गए हैं। विवि के कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने कहा कि सरकार के मिले आदेशों को ही संबंधित विभाग ने अमल में लाते हुए निजी बीएड कॉलेजों को प्रवेश के लिए आदेश दिए हैं।
अब तक 35 फीसदी की शर्त के साथ हुआ प्रवेश
एचपीयू ने अपने और शिक्षा विभाग के धर्मशाला स्थित बीएड संस्थान और संबद्ध निजी बीएड कॉलेजों में प्रवेश परीक्षा में 35 फीसदी अंक की शर्त पूरी करने वाले छात्रों के लिए ही काउंसलिंग कर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की थी। इसमें सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए प्रवेश परीक्षा में 150 का 35 फीसदी यानी 53 अंक प्राप्त करना जरूरी था। वहीं आरक्षित वर्ग के लिए 45 फीसदी अंक प्राप्त करना जरूरी था।
14 कॉलेजों में दस से भी कम सीटें भरी हैं
बीएड में प्रवेश के लिए पूर्व में तय की 35 फीसदी की शर्त के चलते पूरे प्रदेश भर के 72 से अधिक निजी कॉलेजों में कुल 8,950 सीटों में करीब 2,641 सीटें ही भरी जा सकी थीं। करीब 6,309 सीटों पर छात्रों ने प्रवेश ही नहीं लिया था। काउंसलिंग में ही मुश्किल से 30 से 40 फीसदी आवेदनकर्ता छात्र ही अपीयर हुए थे। विवि से संबद्ध 14 निजी बीएड कॉलेजों में दस से कम सीटें भर पाई थी।