फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   hp university banned sca election for one year for these reasons

पढ़िए, किन कारणों से चुनाव पर लगी पाबंदी?

Tue, 26 Aug 2014 10:45 PM IST
Updated Tue, 26 Aug 2014 10:45 PM IST
विज्ञापन
hp university banned sca election for one year for these reasons

अप्रत्यक्ष रूप से एससीए चुनाव करवाने के अलावा विश्वविद्यालय और कार्यकारी परिषद के पास कोई और विकल्प भी नहीं था। इसका पहला कारण नौ माह से अधिकतर कक्षाओं के रिजल्ट हैं।

विज्ञापन


रूसा प्रथम सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम, दूसरे सत्र की मूल्यांकन की प्रक्रिया के साथ ही ईयर सिस्टम के तहत बीए, बीसीए द्वितीय वर्ष के लटके परीक्षा परिणाम के घोषित किए बिना चुनाव करवाना संभव ही नहीं है।
विज्ञापन


यदि विवि बिना परिणाम घोषित किए प्रत्यक्ष चुनाव करवाता तो हजारों छात्र चुनाव लड़ने से वंचित रह जाते। लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक उम्मीदवार छात्र का पिछला परीक्षा परिणाम घोषित होना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विरोध रोकने के लिए भी कारगर

hp university banned sca election for one year for these reasons

चुनाव न करवाने का दूसरा कारण छात्र संगठनों के विरोध को रोकना भी माना जा रहा है। अप्रत्यक्ष चुनाव से छात्रों का फीस बढ़ोतरी, रूसा की खामियों को लेकर पनपा रोष सीधे तौर पर सामने नहीं आएगा।

वहीं कॉलेजों में प्रशासन की मर्जी की एससीए भी बन जाएगी। ईसी द्वारा निकाले गए इस बीच के रास्ते से उम्मीद लगाई जा रही है कि छात्र संगठनों का एससीए चुनाव करवाने को लेकर बन रहा दबाव भी कम होगा।

मगर इसे छात्र संगठन कितना मानते हैं, इसका पता आने वाले दिनों में चलेगा। छात्र संगठन अभी से उग्र आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। तीनों संगठन बुधवार को भी प्रदेश भर के कॉलेजों में इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

हिंसा के नाम पर रोके हैं चुनाव

hp university banned sca election for one year for these reasons

चुनाव न करवाने के पीछे तीसरा और सबसे अहम कारण हिंसा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार हिंसा होने की बात कहकर चुनाव न करवाने का फैसला लिया है। प्रशासन का कहना है कि हिंसा के चलते कैंपस में तनाव हो रहा है। इससे पढ़ाई बाधित हो रही है।

ऐसे में चुनाव होने से माहौल और खराब हो सकता है। प्रशासन लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अध्ययन के बाद ये फैसला ले रहा है। उधर, एसएफआई राज्य सचिव मुनीष का कहना है कि प्रशासन छात्रों के अधिकारों को छीन रहा है।

संगठनों का कहना है कि कहीं भी हिंसा का माहौल नहीं है और यदि चुनाव रोके गए तो हिंसा को बढ़ावा मिलेगा।

पहले भी लग चुकी है पाबंदी

hp university banned sca election for one year for these reasons

यह पहला मौका नहीं है जब एससीए चुनाव पर रोक लगी हो। इससे पहले भी कई बार ऐसे फैसले लिए जा चुके हैं। विश्वविद्यालय और प्रदेश भर के कॉलेजों में 1986 से 88 तक और 1994 से 1999 तक हिंसा को ही आधार मान कर प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाया गया था।

हालांकि इस दौरान अप्रत्यक्ष चुनाव भी नहीं करवाए गए।  विवि के इतिहास में पहली मर्तबा ईसी ने अप्रत्यक्ष चुनाव करवाने का फैसला लिया है। वर्ष 2000 में छात्र संघ चुनाव को बहाल किया गया था। पहले भी प्रदेश में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही छात्र संघ चुनाव पर प्रतिबंध लगाया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed