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बिन गुरु कैसे जले ज्ञान की लौ...

Tue, 30 Jul 2013 06:30 PM IST
कोटद्वार/विजय भट्ट
कोटद्वार/विजय भट्ट Updated Tue, 30 Jul 2013 06:30 PM IST
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How to be a master engineer without the teacher
बिन गुरु ज्ञान कहां से पाऊं...उत्तराखंड के पौड़ी जिले में राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान हल्दूखाता में छात्र तो हैं लेकिन उन्हें तालीम देने वाले शिक्ष्ाक नहीं हैं। बिन शिक्षक ऐसे में यदि इन छात्रों से भविष्य में बेहतरीन इंजीनियर बनने की तमन्ना रखी जाए तो शायद बेमानी हो।
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राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान हल्दूखाता शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। यहां पर छात्र-छात्राओं की संख्या तो 218 है लेकिन शिक्षक सिर्फ तीन। बिना शिक्षक के पढ़ाई करने वाले जूनियर इंजीनियर कैसे पारंगत हो पाएंगे यह सोचनीय प्रश्न है।
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कोटद्वार में पालिटेक्निक संस्थान की स्थापना 2005 में हुई थी। पहले यहां दो ट्रेड कंप्यूटर इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रानिक्स थे। शुरूआती समय में यह राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार के पुराने छात्रावास में संचालित होता रहा।
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वर्ष 2009 में हल्दूखाता में बने नए भवन में शिफ्ट कराया गया, लेकिन इस समय संस्थान में शिक्षकों का टोटा बना हुआ है। यहां पर प्रमुख विषय भौतिक, रसायन, गणित और अंग्रेजी के शिक्षक नहीं हैं। यह सब प्रयोगात्मक विषय हैं। दोनों ट्रेडों में विभागाध्यक्ष भी नहीं हैं।

हास्टल की सुविधा नहीं

पालिटेक्निक में अक्सर बाहर से ही छात्र-छात्राएं आते हैं, लेकिन उनके रहने के लिए यहां कोई हास्टल नहीं है। छात्र-छात्राओं को बाहर किराए पर कमरा लेकर रहना पड़ता है।


इनका कहना है
पालिटेक्निक में शिक्षकों की कमी है लेकिन अभी हम ही पठन कार्य में व्यवस्था कर रहे हैं। प्रयोगशाला में कुछ उपकरण आ चुके हैं कुछ आने है। अभी उपकरणों की कोई अधिक दिक्कत नही है।
- एसए सिद्दीकी, प्रधानाचार्य  राजकीय पालिटेक्निक हल्दूखाता, कोटद्वार
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