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बीबीएयू की परीक्षाओं में अब हिंदी में भी प्रश्न
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 09 May 2014 03:03 AM IST
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी (बीबीएयू) में अब प्रश्नपत्र में हिंदी में भी सवाल पूछे जाएंगे।
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अभी तक बीबीएयू में प्रश्नपत्र में सिर्फ अंग्रेजी में ही छपते थे।
अगर स्टूडेंट चाहेंगे तो हिंदी में पेपर हल कर सकेंगे। यह महत्वपूर्ण निर्णय गुरुवार को बीबीएयू की राजभाषा समिति की बैठक में लिया गया।
इसके अलावा अब स्टूडेंट को पीएचडी की थीसिस भी हिंदी में लिखने की छूट मिल गई है।
बीबीएयू के कुलपति प्रो. आरसी सोबती की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
प्रो. आरसी सोबती ने बैठक में कहा कि विश्वविद्यालय में हिंदी को बढ़ावा देने के लिए सभी शिक्षक एकजुट होकर कोशिश करें।
उन्होंने कहा कि एमएससी व बीएससी की किताबें हिंदी में लिखी जाएं और उसे पढ़ाया भी जाए तो अच्छा होगा। वहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन राजभाषा निदेशालय बनाने का भी फैसला किया।
विश्वविद्यालय कैंपस में यह राजभाषा निदेशालय बनाया जाएगा और इससे हिंदी के प्रचार-प्रसार को बल दिया जाएगा।
प्रोजेक्ट लाने वाले शिक्षकों को बीबीएयू ने दी खुली छूट
बीबीएयू में गुरुवार को एकेडमिक काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने प्रोजेक्ट लाने वाले शिक्षकों को बड़ा तोहफा दिया।
अब प्रोजेक्ट लाने वाले शिक्षकों को उपकरण व अन्य समान की खरीददारी के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, वे अपने स्तर पर ही सामान की खरीद कर सकेंगे।
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इसके अलावा वे अपने प्रोजेक्ट में अपनी मर्जी से नियुक्ति भी कर सकेंगे।
इसका मकसद यह है कि शिक्षक अधिक से अधिक प्रोजेक्ट लाएं और यूनिवर्सिटी में इनोवेशन का एक मजबूत आधार तैयार हो।
वहीं, विश्वविद्यालय ने दूसरे संस्थानों के साथ एमओयू साइन करने के लिए प्रो. एसके भटनागर की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया है।
यह कमेटी दूसरे संस्थानों से एमओयू करने के लिए गाइड लाइन तैयार करेगी। बीबीएयू दूसरे संस्थानों व यूनिवर्सिटी से अधिक से अधिक एमओयू साइन करेंगे।
वहीं, यूनिवर्सिटी में क्वॉलिटी एजूकेशन को बढ़ावा देने के लिए बाहर के एक्सपर्ट से कक्षाएं पढ़वाने के निर्णय को भी हरी झंडी दे दी गई।
बीबीएयू प्रशासन ने कई विभागों में विजिटिंग प्रोफेसर नियुक्त भी कर दिए हैं। एकेडमिक काउंसिल की बैठक में इस पर सहमति दे दी गई है।