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उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की हालत ट्रेजडी फिल्म जैसी

Sun, 03 Aug 2014 04:34 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 03 Aug 2014 04:34 PM IST
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higher education in uttarakhand

उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की हालत हिंदी ट्रेजडी फिल्म जैसे हो गई है। नैनीताल हाईकोर्ट की सख्ती से डरा शासन लगातार कागजी आदेश जारी कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत देखने वाला कोई नहीं है।

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चार अफसरों का स्कूल बना विश्वविद्यालय

इसका एक नमूना श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय भी है। इंफ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की कमी की वजह से विश्वविद्यालय केवल चार अफसरों का स्कूल बन गया है।

विवि को न यूजीसी से पूरी ग्रांट मिल रही है, न राज्य सरकार सुविधाएं बढ़ाने को राजी है। अलबत्ता ऐलान की गई 12 हेक्टेयर जमीन में सिर्फ 2 ही मिल पाई।

नई टिहरी के बादशाही थौल में श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय को बने तीन साल हो चुके हैं। बीते साल सरकार ने सहसपुर में एक अन्य परिसर के लिए विवि को 12 हेक्टेयर जमीन देने का ऐलान किया।
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मगर परिसर निर्माण तो दूर कृषि विभाग से विवि को सिर्फ 2 हेक्टेयर जमीन मिली है। विवि के कुलसचिव प्रो. एके तिवारी का कहना है कि जमीन के लिए विभाग को दोबारा पत्र भेजा गया है। वहां से जमीन मिलने के बाद ही निर्माण हो सकेगा।
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न स्टाफ, न इंफ्रास्ट्रक्चर
कर्मचारियों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी के चलते विवि में न एकेडमिक काउंसिल बनी, न एग्जीक्यूटिव काउंसिल। इस कारण विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे 12 (बी) की मान्यता नहीं दी। ऐसे में विवि को पूरी ग्रांट नहीं मिल रही है।

सचिव का ऐलान, इसी सत्र से कक्षाएं

उच्च शिक्षा सचिव मनीषा पंवार ने बैठक के दौरान विवि के सहसपुर स्थित परिसर में इसी सत्र (2014-15) से ग्रेजुएशन-पोस्ट ग्रेजुएशन की कक्षाएं शुरू करने का ऐलान कर चुकी हैं।


बगैर इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं जुटाए परिसर में कक्षाएं कैसे चलेंगी, जवाब किसी के पास नहीं है।

कॉलेज मिला, भर्ती हुई, बिल्डिंग नदारद
राज्य सरकार ने बीते वर्ष देहरादून को नया पीजी कॉलेज देने की घोषणा की थी। इस साल संबद्धता प्रक्रिया पूरी करने के साथ प्राचार्य समेत कई पदों पर भर्ती हो गई।

मगर अब तक कॉलेज की बिल्डिंग का अता-पता नहीं है। शासन का दावा है कि कॉलेज में इसी सत्र से क्लासेज चलेंगी, लेकिन यह कहां चलेंगी, इसका कोई जवाब नहीं है।

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