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दर्जा मिला नहीं और पढ़ा रहे पीजी कोर्स
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 01 Jul 2014 03:15 PM IST
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उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के प्रति शासन कितना गंभीर है, इसका अंदाजा नौ कॉलेजों की स्थिति से लगाया जा सकता है।
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धूल फांक रही कॉलेज की फाइलें
इन सभी कॉलेजों को स्नातक कक्षाएं संचालित करने का दर्जा हासिल है, जबकि यहां पीजी कोर्सेज भी पढ़ाए जा रहे हैं। कॉलेजों की ओर से शासन को उच्चीकरण के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन लंबे समय से इनकी फाइलें धूल फांक रही हैं।
कक्षाएं संचालित करने के बावजूद पीजी स्टेटस न मिलने से इन कालेजों को जरूरी ग्रांट नहीं मिल पा रही है। इससे कॉलेजों में पीजी कक्षाओं के अनुरूप संसाधन जुटाने में दिक्कतें आ रही हैं।
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खास बात यह है कि राज्य सरकार पर इससे कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ना है।
यह है स्थिति
राजकीय महाविद्यालय टिहरी: वर्ष 2004 से यहां एमए हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, गृह विज्ञान, सैन्य विज्ञान, सांख्यिकी, वाणिज्य, एमएससी गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान और वनस्पति विज्ञान पढ़ाए जा रहे हैं। यहां कुल छात्र संख्या 1167 है।
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राजकीय महाविद्यालय लैंसडौन: एमएससी रसायन विज्ञान, जंतु विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, एमए हिंदी, अर्थशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान और वाणिज्य वर्ष 2008 से पढ़ाए जा रहे हैं।
राजकीय महाविद्यालय डोईवाला: वर्ष 2008 से एमए हिंदी, अंग्रेजी, राजनीतिक विज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और इतिहास पढ़ाया जा रहा है।
राजकीय महाविद्यालय डाकपत्थर: वर्ष 2003 से एमकॉम पढ़ाया जा रहा है। सत्र 2014-15 से एमएससी भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, एमए हिंदी, अंग्रेजी, राजनीतिक विज्ञान और इतिहास पढ़ाया जाएगा।
राजकीय महाविद्यालय कर्णप्रयाग: वर्ष 2008 से एमए हिंदी और अर्थशास्त्र।
राजकीय महाविद्यालय मानिला (अल्मोड़ा): वर्ष 2008 से एमए इतिहास और अर्थशास्त्र।
राजकीय महाविद्यालय स्यालदे (अल्मोड़ा): वर्ष 2003 से एमए हिंदी और अर्थशास्त्र।
राजकीय महाविद्यालय चंपावत: एमए अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान पढ़ाया जा रहा है।
राजकीय महाविद्यालय बाजपुर: इस वर्ष शासन ने एमए राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, हिंदी और इतिहास पढ़ाने की अनुमति दी है।
पढ़ाई में अव्वल हैं ये कॉलेज
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल (नैक) शिक्षा की गुणवत्ता के आधार पर कॉलेजों का ग्रेड निर्धारित करती है।
राजकीय महाविद्यालय नई टिहरी को नैक बी ग्रेड, लैंसडौन को सी++ ग्रेड और स्यालदे को सी ग्रेड मिला है। इसके बावजूद इन्हें उच्चीकृत नहीं किया जा रहा।
यहां 21 छात्रों पर उच्चीकरण
शासन ने भले ही वर्षों से पीजी कक्षाएं चला रहे यूजी कॉलेजों का उच्चीकरण नहीं किया हो, लेकिन महज एमए के 21 छात्रों वाले राजकीय महाविद्यालय नारायणनगर (पिथौरागढ़) का उच्चीकरण कर दिया गया है।
सूत्रों की मानें तो अफसरों और राजनेताओं की मनमानी से यह सब हुआ है।
हमने कई बार इन कॉलेजों के उच्चीकरण के प्रस्ताव शासन को भेजे हैं। जैसे ही शासन से कुछ जवाब आएगा तो उच्चीकरण की प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी।
- डॉ. मुकुल पंत, निदेशक, उच्च शिक्षा